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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 12/268 / 570

240उस भारतीय सिक्के का परिदान जिसका कूटकृत होना कब्जे में आने के समय ज्ञात था

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 47स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई अपने पास कोई ऐसा कूटकृत सिक्का होते हुए, जो [भारतीय सिक्के] की कूटकृति हो और जिसे वह उस समय, जब वह उसके कब्जे में आया था, जानता था कि वह [भारतीय सिक्के] की कूटकृति है, कपटपूर्वक, या इस आशय से कि कपट किया जाए, उसे किसी व्यक्ति को परिदत्त करेगा या किसी व्यक्ति को उसे लेने के लिए उत्प्रेरित करने का प्रयत्न करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।

संशोधन टिप्पणियां

  1. विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “क्वीन के सिक्के” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

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