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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 12/258 / 570

230“सिक्का” की परिभाषा

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 46स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

[सिक्का, तत्समय धन के रूप में उपयोग में लाई जा रही और इस प्रकार उपयोग में लाए जाने के लिए किसी राज्य या संपूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न शक्ति के प्राधिकार द्वारा, स्टाम्पित और प्रचालित धातु है ।]

भारतीय सिक्का— [भारतीय सिक्का धन के रूप में उपयोग में लाए जाने के लिए भारत सरकार के प्राधिकार द्वारा स्टाम्पित और प्रचालित धातु है ; और इस प्रकार स्टाम्पित और प्रचालित धातु इस अध्याय के प्रयोजनों के लिए भारतीय सिक्का बनी रहेगी, यद्यपि धन के रूप में उसका उपयोग में लाया जाना बन्द हो गया हो ।]

दृष्टांत

(क) कौड़ियां सिक्के नहीं हैं ।

(ख) अस्टाम्पित तांबे के टुकड़े, यद्यपि धन के रूप में उपयोग में लाए जाते हैं, सिक्के नहीं हैं ।

(ग) पदक सिक्के नहीं हैं, क्योंकि वे धन के रूप में उपयोग में लाए जाने के लिए आशयित नहीं हैं ।

(घ) जिस सिक्के का नाम कम्पनी रुपया है, वह [भारतीय सिक्का] है।

[(ङ) “फरूखाबाद रुपया”, जो धन के रूप में भारत सरकार के प्राधिकार के अधीन पहले कभी उपयोग में लाया जाता था, [भारतीय सिक्का] है, यद्यपि वह अब इस प्रकार उपयोग में नहीं लाया जाता है ।]

संशोधन टिप्पणियां

  1. 1872 के अधिनियम सं० 19 की धारा 1 द्वारा प्रथम मूल पैरा के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  2. विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा पूर्ववर्ती पैरा के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  3. विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा “क्वीन का सिक्का” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
  4. 1896 के अधिनियम सं० 6 की धारा 1 द्वारा जोड़ा गया ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।