भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 11/257 / 570
229कजमानत या बंधपत्र पर छोड़े गए व्यक्ति द्वारा न्यायालय में हाजिर होने में असफलता
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 46स्रोत
यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
जो कोई, किसी अपराध से आरोपित किए जाने पर और जमानत पर या अपने बंधपत्र पर छोड़ दिए जाने पर, जमानत या बंधपत्र के निबंधनों के अनुसार न्यायालय में पर्याप्त कारणों के बिना (जो साबित करने का भार उस पर होगा) हाजिर होने में असफल रहेगा वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।
स्पष्टीकरण—इस धारा के अधीन दंड—
(क) उस दंड के अतिरिक्त है, जिसके लिए अपराधी उस अपराध के लिए, जिसके लिए उसे आरोपित किया गया है, दोषसिद्धि पर दायी होता ; और
(ख) न्यायालय की बंधपत्र के समपहरण का आदेश करने की शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला नहीं है ।]
संशोधन टिप्पणियां
- 2005 के अधिनियम सं० 25 की धारा 44 द्वारा अंतःस्थापित ।
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