भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 11/234 / 570
212अपराधी को संश्रय देना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 40–41स्रोत
यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
जबकि कोई अपराध किया जा चुका हो, तब जो कोई किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसके बारे में वह जानता हो या विश्वास करने का कारण रखता हो कि वह अपराधी है, वैध दंड से प्रतिच्छादित करने के आशय से संश्रय देगा या छिपाएगा ;
यदि अपराध मृत्यु से दंडनीय हो—यदि वह अपराध मृत्यु से दंडनीय हो तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ;
यदि अपराध आजीवन कारावास से या कारावास से दंडनीय हो—और यदि वह अपराध [आजीवन कारावास] से, या दस वर्ष तक के कारावास से, दंडनीय हो, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ;
और यदि वह अपराध एक वर्ष तक, न कि दस वर्ष तक के कारावास से दंडनीय हो, तो वह उस अपराध के लिए उपबंधित भांति के कारावास से, जिसकी अवधि उस अपराध के लिए उपबंधित कारावास की दीर्घतम अवधि की एक-चौथाई तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ;
[इस धारा में “अपराध” के अंतर्गत [भारत] से बाहर किसी स्थान पर किया गया ऐसा कार्य आता है, जो, यदि [भारत] में किया जाता हो तो निम्नलिखित धारा, अर्थात् 302, 304, 382, 392, 393, 394, 395, 396, 397, 398, 399, 402, 435, 436, 449, 450, 457, 458, 459 और 460 में से किसी धारा के अधीन दंडनीय होता और हर एक ऐसा कार्य इस धारा के प्रयोजनों के लिए ऐसे दंडनीय समझा जाएगा, मानो अभियुक्त व्यक्ति उसे [भारत] में करने का दोषी था ।]
अपवाद—इस उपबंध का विस्तार किसी ऐसे मामले पर नहीं है जिससे अपराधी को संश्रय देना या छिपाना उसके पति या पत्नी द्वारा हो ।
दृष्टांत
क यह जानते हुए कि ख ने डकैती की है, ख को वैध दंड से प्रतिच्छादित करने के लिए जानते हुए छिपा लेता है । यहां, ख [आजीवन कारावास] से दंडनीय है, क तीन वर्ष से अनधिक अवधि के लिए दोनों में से किसी भांति के कारावास से दंडनीय है और जुर्माने से भी दंडनीय है।
संशोधन टिप्पणियां
- 1955 के अधिनियम सं० 26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा “आजीवन निर्वासन” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1894 के अधिनियम सं० 3 की धारा 7 द्वारा अंतःस्थापित ।
- “ब्रिटिश भारत” शब्द अनुक्रमशः भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948, विधि अनुकूलन आदेश, 1950 और 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा प्रतिस्थापित किए गए हैं ।
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