भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 11/250 / 570
225कउन दशाओं में जिनके लिए अन्यथा उपबंध नहीं है लोक सेवक द्वारा पकड़ने का लोप या निकल भागना सहन करना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 44–45स्रोत
यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
जो कोई ऐसा लोक सेवक होते हुए जो किसी व्यक्ति को पकड़ने या परिरोध में रखने के लिए लोक सेवक के नाते वैध रूप से आबद्ध हो उस व्यक्ति को किसी ऐसी दशा में, जिसके लिए धारा 221, धारा 222 या धारा 223 अथवा किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि में कोई उपबंध नहीं है, पकड़ने का लोप करेगा या परिरोध में से निकल भागना सहन करेगा—
(क) यदि वह ऐसा साशय करेगा, तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से, या दोनों से, तथा
(ख) यदि वह ऐसा उपेक्षापूर्वक करेगा तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से,
दंडित किया जाएगा ।
संशोधन टिप्पणियां
- 1886 के अधिनियम सं० 10 की धारा 24(1) द्वारा धारा 225क तथा 225ख को धारा 225क, जो 1870 के अधिनियम सं० 27 की धारा 9 द्वारा अंतःस्थापित की गई थी, के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
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