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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 11/217 / 570

195ककिसी व्यक्ति को मिथ्या साक्ष्य देने के लिए धमकाना या उत्प्रेरित करना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 38स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई किसी दूसरे व्यक्ति को, उसके शरीर, ख्याति या संपत्ति को अथवा ऐसे व्यक्ति के शरीर या ख्याति को, जिसमें वह व्यक्ति हितबद्ध है, यह कारित करने के आशय से कोई क्षति करने की धमकी देता है, कि वह व्यक्ति मिथ्या साक्ष्य दे तो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा ;

और यदि कोई निर्दोष व्यक्ति ऐसे मिथ्या साक्ष्य के परिणामस्वरूप मृत्यु से या सात वर्ष से अधिक के कारावास से दोषसिद्ध और दंडादिष्ट किया जाता है तो ऐसा व्यक्ति, जो धमकी देता है, उसी दंड से दंडित किया जाएगा और उसी रीति में और उसी सीमा तक दंडादिष्ट किया जाएगा जैसे निर्दोष व्यक्ति दंडित और दंडादिष्ट किया गया है ।]

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  1. 2006 के अधिनियम सं० 2 की धारा 2 द्वारा अंतःस्थापित ।

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