भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 3/56 / 570
53कनिर्वासन के प्रति निर्देश का अर्थ लगाना
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
नए कानून में यह धारा नहीं रखी गई1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
(1) उपधारा (2) के और उपधारा (3) के उपबन्धों के अध्यधीन किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि में, या किसी ऐसी विधि या किसी निरसित अधिनियमिति के आधार पर प्रभावशील किसी लिखत या आदेश में “आजीवन निर्वासन” के प्रति निर्देश का अर्थ यह लगाया जाएगा कि वह “आजीवन कारावास” के प्रति निर्देश है ।
(2) हर मामले में, जिसमें कि किसी अवधि के लिए निर्वासन का दण्डादेश दण्ड प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, [1955 (1955 का 26)] के प्रारम्भ से पूर्व दिया गया है, अपराधी से उसी प्रकार बरता जाएगा, मानो वह उसी अवधि के लिए कठिन कारावास के लिए दण्डादिष्ट किया गया हो ।
(3) किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि में किसी अवधि के लिए निर्वासन या किसी लघुतर अवधि के लिए निर्वासन के प्रति (चाहे उसे कोई भी नाम दिया गया हो) कोई निर्देश लुप्त कर दिया गया समझा जाएगा ।
(4) किसी अन्य तत्समय प्रवृत्त विधि में निर्वासन के प्रति जो कोई निर्देश हो—
(क) यदि उस पद से आजीवन निर्वासन अभिप्रेत है, तो उसका अर्थ आजीवन कारावास के प्रति निर्देश होना लगाया जाएगा ;
(ख) यदि उस पद से किसी लघुतर अवधि के लिए निर्वासन अभिप्रेत है, तो यह समझा जाएगा कि वह लुप्त कर दिया गया है ।]
संशोधन टिप्पणियां
- 1955 के अधिनियम सं० 26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा अंतःस्थापित ।
- 1957 के अधिनियम सं० 36 की धारा 3 और अनुसूची 2 द्वारा “1954” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
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