भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 3/68 / 570
64जुर्माना न देने पर कारावास का दण्डादेश
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 9–10स्रोत
यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
[कारावास और जुर्माना दोनों से दण्डनीय अपराध के हर मामले में, जिसमें अपराधी कारावास सहित या रहित, जुर्माने से दण्डादिष्ट हुआ है, तथा [कारावास या जुर्माने अथवा] केवल जुर्माने से दंडनीय अपराध के हर मामले में, जिसमें अपराधी जुर्माने से दण्डादिष्ट हुआ है,] वह न्यायालय, जो ऐसे अपराधी को दण्डादिष्ट करेगा, सक्षम होगा कि दण्डादेश द्वारा निदेश दे कि जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा में, अपराधी अमुक अवधि के लिए कारावास भोगेगा जो कारावास उस अन्य कारावास के अतिरिक्त होगा जिसके लिए वह दण्डादिष्ट हुआ है या जिससे वह दण्डादेश के लघुकरण पर दण्डनीय है ।
संशोधन टिप्पणियां
- 1882 के अधिनियम सं० 8 की धारा 2 द्वारा “प्रत्येक ऐसी दशा में जिसमें अपराधी जुर्माने से दंडादिष्ट हुआ है” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।
- 1886 के अधिनियम सं० 10 की धारा 21(2) द्वारा अंतःस्थापित ।
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