भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 3/59 / 570
55क“समुचित सरकार” की परिभाषा
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
धारा 54 और 55 में “समुचित सरकार” पद से,—
(क) उन मामलों में केन्द्रीय सरकार अभिप्रेत है, जिनमें दंडादेश मृत्यु का दण्डादेश है, या ऐसे विषय से, जिस पर संघ की कार्यपालन शक्ति का विस्तार है, संबंधित किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए है ; तथा
(ख) उन मामलों में उस राज्य की सरकार, जिसके अन्दर अपराधी दण्डादिष्ट हुआ है, अभिप्रेत है, जहां कि दंडादेश (चाहे मृत्यु का हो या नहीं) ऐसे विषय से, जिस पर राज्य की कार्यपालन शक्ति का विस्तार है, संबंधित किसी विधि के विरुद्ध अपराध के लिए है ।]
संशोधन टिप्पणियां
- विधि अनुकूलन आदेश, 1950 द्वारा धारा 55क के स्थान पर प्रतिस्थापित । धारा 55क भारत शासन (भारतीय विधि अनुकूलन) आदेश, 1937 द्वारा अंतःस्थापित की गई थी।
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