भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 3/71 / 570
67जुर्माना न देने पर कारावास, जबकि अपराध केवल जुर्माने से दण्डनीय हो
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यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
यदि अपराध केवल जुर्माने से दण्डनीय हो तो [वह कारावास, जिसे न्यायालय जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा के लिए अधिरोपित करे, सादा होगा और] वह अवधि, जिसके लिए जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने की दशा के लिए न्यायालय अपराधी को कारावासित करने का निदेश दे, निम्न मापमान से अधिक नहीं होगी, अर्थात्:—जब कि जुर्माने का परिमाण पचास रुपए से अधिक न हो तब दो मास से अनधिक कोई अवधि, तथा जब कि जुर्माने का परिमाण एक सौ रुपए से अधिक न हो तब चार मास से अनधिक कोई अवधि, तथा किसी अन्य दशा में छह मास से अनधिक कोई अवधि ।
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- 1882 के अधिनियम सं० 8 की धारा 3 द्वारा अंतःस्थापित ।
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