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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 3/77 / 570

73एकांत परिरोध

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 11स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जब कभी कोई व्यक्ति ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध ठहराया जाता है जिसके लिए न्यायालय को इस संहिता के अधीन उसे कठिन कारावास से दंडादिष्ट करने की शक्ति है, तो न्यायालय अपने दंडादेश द्वारा आदेश दे सकेगा कि अपराधी को उस कारावास के, जिसके लिए वह दंडादिष्ट किया गया है, किसी भाग या भागों के लिए, जो कुल मिलाकर तीन मास से अधिक न होंगे, निम्न मापमान के अनुसार एकांत परिरोध में रखा जाएगा, अर्थात् :—

यदि कारावास की अवधि छह मास से अधिक न हो तो एक मास से अनधिक समय ;

यदि कारावास की अवधि छह मास से अधिक हो और [एक वर्ष से अधिक न हो] तो दो मास से अनधिक समय ;

यदि कारावास की अवधि एक वर्ष से अधिक हो तो तीन मास से अनधिक समय ।

संशोधन टिप्पणियां

  1. 1882 के अधिनियम सं० 8 की धारा 5 द्वारा “एक वर्ष से कम नहीं हो” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।