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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 2/20 / 531

20अभियोजन निदेशालय

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 165–166स्रोत

(1) राज्य सरकार,—

(क) राज्य में एक अभियोजन निदेशालय स्थापित कर सकेगी, जिसमें एक अभियोजन निदेशक और उतने अभियोजन उपनिदेशक हो सकेंगे, जैसा वह ठीक समझे ; और

(ख) प्रत्येक जिले के जिला अभियोजन निदेशालय में उतने अभियोजन उपनिदेशक और अभियोजन सहायक निदेशक हो सकेंगे, जैसा वह ठीक समझे ।

(2) कोई व्यक्ति,—

(क) अभियोजन निदेशक या अभियोजन उप-निदेशक के रूप में नियुक्ति के लिए तभी पात्र होगा यदि वह अधिवक्ता के रूप में कम-से-कम पंद्रह वर्ष तक व्यवसाय में रहा है, सेशन न्यायाधीश है या रहा है ; और

(ख) अभियोजन सहायक निदेशक के रूप में नियुक्ति के लिए तभी पात्र होगा यदि वह अधिवक्ता के रूप में कम से कम सात वर्ष तक व्यवसाय में रहा हो या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट रहा हो ।

(3) अभियोजन निदेशालय का प्रधान अभियोजन निदेशक होगा, जो राज्य में गृह विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन कृत्य करेगा ।

(4) प्रत्येक अभियोजन उप-निदेशक या अभियोजन सहायक निदेशक, अभियोजन निदेशक के अधीनस्थ होगा ; और प्रत्येक अभियोजन सहायक निदेशक, अभियोजन उपनिदेशक के अधीनस्थ होगा ।

(5) उच्च न्यायालयों में मामलों का संचालन करने के लिए, धारा 18 की उपधारा (1) या उपधारा (8) के अधीन राज्य सरकार द्वारा नियुक्त प्रत्येक लोक अभियोजक, अपर लोक अभियोजक और विशेष लोक अभियोजक, अभियोजन निदेशक के अधीनस्थ होंगे ।

(6) धारा 18 की उपधारा (3) या उपधारा (8) के अधीन जिला न्यायालयों में मामलों का संचालन करने के लिए राज्य सरकार द्वारा नियुक्त प्रत्येक लोक अभियोजक, अपर लोक अभियोजक और विशेष लोक अभियोजक, और धारा 19 की उपधारा (1) के अधीन नियुक्त प्रत्येक सहायक लोक अभियोजक, अभियोजन उप-निदेशक, अभियोजन सहायक निदेशक के अधीनस्थ होंगे ।

(7) अभियोजन निदेशक की शक्तियां और कृत्य, ऐसे मामलों की कार्यवाहियों के शीघ्र निपटारे के लिए तथा अपील फाइल करने पर राय देने के लिए मानीटर करना होगा, जिसमें अपराध दस वर्ष या उससे अधिक या आजीवन कारावास या मृत्यु से दंडनीय है ।

(8) अभियोजन उप-निदेशक की शक्तियां और कृत्य ऐसे मामलों में जिनमें अपराध सात वर्ष या उससे अधिक के लिए दंडनीय है, किंतु दस वर्ष से कम हो, उनके त्वरित निपटान को सुनिश्चित करने के लिए पुलिस रिपोर्ट की परीक्षा करना और संवीक्षा करना तथा मानीटर करना होगा ।

(9) अभियोजन सहायक निदेशक के कृत्य ऐसे मामलों का मानीटर करना होगा, जिनमें कोई अपराध सात वर्ष से कम के लिए दंडनीय है ।

(10) उपधारा (7), उपधारा (8) और उपधारा (9) में अंतर्विष्ट किसी बात के होते हुए भी, अभियोजन का निदेशक, उप-निदेशक या सहायक निदेशक को, इस संहिता के अधीन सभी कार्रवाइयों के लिए संव्यवहार करने की शक्ति होगी और उसके लिए दायी होंगे ।

(11) अभियोजन निदेशक, अभियोजन उप-निदेशक या अभियोजन सहायक निदेशक की अन्य शक्तियां और कृत्य और वह क्षेत्र, जिसके लिए प्रत्येक अभियोजन उप-निदेशक या अभियोजन सहायक निदेशक नियुक्त किया गया है, वह होगा, जिसे राज्य सरकार, अधिसूचना द्वारा, निर्दिष्ट करे ।

(12) इस धारा के उपबंध, लोक अभियोजक के कृत्यों का पालन करते समय, राज्य के महाधिवक्ता पर लागू नहीं होंगे ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।