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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 34/461 / 531

461जुर्माना उद्गृहीत करने के लिए वारंट

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 350–351स्रोत

(1) जब किसी अपराधी को जुर्माने का संदाय करने के लिए दंडादेश दिया गया है, किन्तु ऐसा संदाय नहीं किया गया है, तब दंडादेश देने वाला न्यायालय निम्नलिखित में से किसी एक या दोनों प्रकार से जुर्माने की वसूली के लिए कार्रवाई कर सकेगा, अर्थात् वह,—

(क) अपराधी की किसी चल संपत्ति की कुर्की और विक्रय द्वारा रकम को उद्गृहीत करने के लिए वारंट जारी कर सकेगा ;

(ख) व्यतिक्रमी की चल या अचल संपत्ति या दोनों से भू-राजस्व की बकाया के रूप में रकम को उद्गृहीत करने के लिए जिले के कलक्टर को प्राधिकृत करते हुए उसे वारंट जारी कर सकेगा :

परन्तु यदि दंडादेश निदेशित करता है कि जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर अपराधी कारावासित किया जाएगा और यदि अपराधी ने व्यतिक्रम के बदले में ऐसा पूरा कारावास भुगत लिया है तो कोई न्यायालय ऐसा वारंट तब तक नहीं जारी करेगा जब तक वह विशेष कारणों से जो अभिलिखित किए जाएं, ऐसा करना आवश्यक न समझे या जब तक उसने जुर्माने में से व्यय या प्रतिकर के संदाय के लिए धारा 395 के अधीन आदेश नहीं किया हो ।

(2) राज्य सरकार, उस रीति को विनियमित करने के लिए, जिससे उपधारा (1) के खंड (क) के अधीन वारंट निष्पादित किए जाने हैं और ऐसे वारंट के निष्पादन में कुर्क की गई किसी संपत्ति के बारे में अपराधी से भिन्न किसी व्यक्ति द्वारा किए गए किन्हीं दावों के संक्षिप्त अवधारण के लिए, नियम बना सकेगी ।

(3) जहां न्यायालय, कलक्टर को उपधारा (1) के खंड (ख) के अधीन वारंट जारी करता है वहां कलक्टर उस रकम को भू-राजस्व की बकाया की वसूली से संबंधित विधि के अनुसार वसूल करेगा मानो ऐसा वारंट ऐसी विधि के अधीन जारी किया गया प्रमाणपत्र हो:

परन्तु ऐसा कोई वारंट अपराधी की गिरफ्तारी या कारावास में निरोध द्वारा निष्पादित नहीं किया जाएगा ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।