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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 34/473 / 531

473दंडादेशों का निलम्बन या परिहार करने की शक्ति

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 354–355स्रोत

(1) जब किसी व्यक्ति को किसी अपराध के लिए दंडादेश दिया जाता है, तब समुचित सरकार, किसी समय, शर्तों के बिना या ऐसी शर्तों पर, जिन्हें दंडादिष्ट व्यक्ति स्वीकार करता है, उसके दंडादेश के निष्पादन का निलंबन कर सकेगी या जो दंडादेश उसे दिया गया है, उस संपूर्ण दंडादेश का या उसके किसी भाग का परिहार कर सकेगी ।

(2) जब कभी समुचित सरकार से दंडादेश के निलम्बन या परिहार के लिए आवेदन किया जाता है, तब समुचित सरकार उस न्यायालय के पीठासीन न्यायाधीश से, जिसके समक्ष या जिसके द्वारा दोषसिद्धि हुई थी या जिसके द्वारा उसकी पुष्टि की गई थी, अपेक्षा कर सकेगी कि वह, इस बारे में कि आवेदन मंजूर किया जाए या नामंजूर किया जाए, ऐसी राय के लिए अपने कारणों सहित कथित करे और अपनी राय के कथन के साथ विचारण के अभिलेख की या उसके ऐसे अभिलेख की, जैसा विद्यमान हो, प्रमाणित प्रतिलिपि भी भेजे ।

(3) यदि कोई शर्त, जिस पर दंडादेश का निलम्बन या परिहार किया गया है, समुचित सरकार की राय में पूरी नहीं हुई है तो समुचित सरकार निलम्बन या परिहार को रद्द कर सकेगी और तब, यदि वह व्यक्ति, जिसके पक्ष में दंडादेश का निलम्बन या परिहार किया गया था, मुक्त है तो वह किसी पुलिस अधिकारी द्वारा वारंट के बिना गिरफ्तार किया जा सकेगा और दंडादेश के असमाप्त भाग को भोगने के लिए प्रतिप्रेषित किया जा सकेगा ।

(4) वह शर्त, जिस पर इस धारा के अधीन दंडादेश का निलम्बन या परिहार किया जाए, ऐसी हो सकेगी, जो उस व्यक्ति द्वारा, जिसके पक्ष में दंडादेश का निलम्बन या परिहार किया जाए, पूरी की जाने वाली हो या ऐसी हो सकेगी, जो उसकी इच्छा पर आश्रित न हो ।

(5) समुचित सरकार, दंडादेशों के निलम्बन के बारे में, और उन शर्तों के बारे में, जिन पर याचिकाएं प्रस्तुत की जानी चाहिए और निपटाई जानी चाहिए, साधारण नियमों या विशेष आदेशों द्वारा निदेश दे सकेगी :

परन्तु अठारह वर्ष से अधिक की आयु के किसी व्यक्ति के विरुद्ध किसी दंडादेश की दशा में (जो जुर्माने के दंडादेश से भिन्न है), दंडादिष्ट व्यक्ति द्वारा या उसकी ओर से किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दी गई कोई ऐसी याचिका तब तक ग्रहण नहीं की जाएगी, जब तक दंडादिष्ट व्यक्ति कारागार में न हो, और—

(क) जहां ऐसी याचिका दंडादिष्ट व्यक्ति द्वारा दी जाती है, वहां जब तक वह कारागार के भारसाधक अधिकारी के माध्यम से प्रस्तुत न की जाए ; या

(ख) जहां ऐसी याचिका किसी अन्य व्यक्ति द्वारा दी जाती है, वहां जब तक उसमें यह घोषणा नहीं हो कि दंडादिष्ट व्यक्ति कारागार में है ।

(6) ऊपर की उपधाराओं के उपबंध, इस संहिता की या किसी अन्य विधि की किसी धारा के अधीन दंड न्यायालय द्वारा पारित ऐसे आदेश को भी लागू होंगे, जो किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता को निर्बन्धित करता है या उस पर या उसकी सम्पत्ति पर कोई दायित्व अधिरोपित करता है ।

(7) इस धारा में और धारा 474 में, “समुचित सरकार” पद से,—

(क) उन मामलों में, जहां दंडादेश ऐसे विषय से संबंधित किसी विधि के विरुद्ध अपराध है, या उपधारा (6) में निर्दिष्ट पारित आदेश किसी विधि के अधीन है, जिससे संबंधित विषय पर संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार केन्द्रीय सरकार तक है, अभिप्रेत है :

(ख) अन्य मामलों में, उस राज्य की सरकार अभिप्रेत है, जिसके भीतर अपराधी दंडादिष्ट किया गया है या उक्त आदेश पारित किया गया है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।