भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 34/472 / 531
472मृत्यु दंडादेश मामलों में दया याचिका
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 353–354स्रोत
(1) मृत्यु दंडादेश के अधीन सिद्धदोष ठहराया गया कोई व्यक्ति या उसका विधिक उत्तराधिकारी या कोई अन्य संबंधी, यदि उसने पहले से दया याचिका प्रस्तुत नहीं की है, तो वह संविधान के अनुच्छेद 72 के अधीन भारत के राष्ट्रपति या अनुच्छेद 16 के अधीन राज्य के राज्यपाल के समक्ष दया याचिका फाइल कर सकेगा, जो ऐसी तारीख से तीस दिन की अवधि के भीतर, जिसको कारागार अधीक्षक,—
(i) उच्चतम न्यायालय द्वारा अपील, पुनर्विलोकन या विशेष इजाजत अपील के निरस्त करने के बारे में उसे सूचित करता है ; या
(ii) उच्च न्यायालय द्वारा मृत्यु दंडादेश की पुष्टि की तारीख के बारे में और उच्चतम न्यायालय में कोई अपील या विशेष इजाजत फाइल करने के लिए अनुज्ञात समय समाप्त हो गया है, सूचित करता है ।
(2) उपधारा (1) के अधीन याचिका आरंभ में राज्यपाल को की जा सकेगी और राज्यपाल द्वारा उसके निरस्त करने या निपटारा किए जाने पर, ऐसी याचिका के निरस्त या निपटारा किए जाने की तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर राष्ट्रपति को की जाएगी ।
(3) कारागार अधीक्षक या कारागार प्रभारी सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक सिद्धदोष, एक से अधिक सिद्धदोष होने की दशा में साठ दिन की अवधि के भीतर दया याचिका भी फाइल करे और अन्य सिद्धदोषों से ऐसी याचिका प्राप्त न होने की दशा में, कारागार अधीक्षक, नाम, पता, मामले के अभिलेख की प्रति और मामले के सभी अन्य ब्यौरे उक्त दया याचिका के साथ विचार के लिए केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार को भेजेगा ।
(4) केंद्रीय सरकार, दया याचिका की प्राप्ति पर राज्य सरकार से टिप्पणियां मांगेगी और मामले के अभिलेख सहित याचिका पर विचार करेगी तथा राज्य सरकार की टिप्पणियों और जेल अधीक्षक से अभिलेखों की प्राप्ति की तारीख से साठ दिन की अवधि के भीतर यथा संभवशीघ्र इस निमित्त राष्ट्रपति को सिफारिश करेगी ।
(5) राष्ट्रपति, दया याचिका पर विचार, विनिश्चय और उसका निपटारा कर सकेगा तथा किसी मामले में यदि एक से अधिक सिद्धदोष हैं तो, याचिकाएं न्यायहित में एक साथ राष्ट्रपति द्वारा विनिश्चित की जाएंगी ।
(6) केंद्रीय सरकार, दया याचिका पर राष्ट्रपति के आदेश की प्राप्ति पर, राज्य सरकार के गृह विभाग और कारागार अधीक्षक या कारागार के प्रभारी अधिकारी को अड़तालीस घंटे के भीतर संसूचित करेगी ।
(7) संविधान के अनुच्छेद 72 या अनुच्छेद 161 के अधीन राष्ट्रपति या राज्यपाल के आदेश के विरुद्ध किसी न्यायालय में कोई अपील नहीं होगी और यह अंतिम होगा तथा राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा विनिश्चय पर पहुंचने के किसी प्रश्न पर किसी न्यायालय में कोई जांच नहीं की जाएगी ।
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