भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 34/464 / 531
464कारावास के दंडादेश के निष्पादन का निलंबन
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 351–352स्रोत
(1) जब अपराधी को केवल जुर्माने का और जुर्माना देने में व्यतिक्रम होने पर कारावास का दंडादेश दिया गया है और जुर्माना तत्काल नहीं दिया जाता है, तब न्यायालय—
(क) आदेश दे सकेगा कि जुर्माना या तो ऐसी तारीख को या उससे पहले, जो उस आदेश की तारीख से तीस दिन के पश्चात् की नहीं होगी, पूर्णतः संदेय होगा, या दो या तीन किस्तों में संदेय होगा जिनमें से पहली किस्त ऐसी तारीख को या उससे पहले संदेय होगी, जो आदेश की तारीख से तीस दिन के पश्चात् की नहीं होगी और, अन्य किस्त या किस्तें, यथास्थिति, तीस दिन से अनधिक के अन्तराल या अन्तरालों पर संदेय होगी या होंगी :
(ख) कारावास के दंडादेश का निष्पादन निलम्बित कर सकेगा और अपराधी द्वारा, जैसा न्यायालय ठीक समझे, इस शर्त का बंधपत्र या जमानतपत्र निष्पादित किए जाने पर कि, यथास्थिति, जुर्माना या उसकी किस्तें देने की तारीख या तारीखों को वह न्यायालय के समक्ष उपस्थित होगा, अपराधी को छोड़ सकेगा ; और यदि, यथास्थिति, जुर्माने की या किसी किस्त की रकम उस अंतिम तारीख को या उसके पूर्व जिसको वह आदेश के अधीन संदेय हो, प्राप्त न हो तो न्यायालय कारावास के दंडादेश के तुरंत निष्पादित किए जाने का निदेश दे सकेगा ।
(2) उपधारा (1) के उपबंध किसी ऐसे मामले में भी लागू होंगे जिसमें ऐसे धन के संदाय के लिए आदेश किया गया है जिसके वसूल न होने पर कारावास अधिनिर्णीत किया जा सकेगा और धन तुरंत नहीं दिया गया है, और यदि वह व्यक्ति जिसके विरुद्ध आदेश दिया गया है उस उपधारा में निर्दिष्ट बंधपत्र लिखने की अपेक्षा किए जाने पर ऐसा करने में असफल रहता है तो न्यायालय कारावास का दंडादेश तुरन्त पारित कर सकेगा ।
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