भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 35/479 / 531
479अधिकतम अवधि, जिसके लिए विचाराधीन कैदी निरुद्ध किया जा सकता है
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 357–358स्रोत
(1) जहां कोई व्यक्ति, किसी विधि के अधीन किसी अपराध के लिए इस संहिता के अधीन (जो ऐसा अपराध नहीं है जिसके लिए उस विधि के अधीन मृत्युदंड या आजीवन कारावास एक दंड के रूप में विनिर्दिष्ट किया गया है) अन्वेषण, जांच या विचारण की अवधि के दौरान कारावास की उस अधिकतम अवधि के, जो उस विधि के अधीन उस अपराध के लिए विनिर्दिष्ट की गई है, आधे से अधिक की अवधि के लिए निरोध भोग चुका है, वहां वह न्यायालय द्वारा जमानत पर छोड़ दिया जाएगा :
परन्तु ऐसा व्यक्ति प्रथम बार का अपराधी है और जिसे (पूर्व में किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध नहीं किया गया हो) तो वह न्यायालय द्वारा बंधपत्र पर छोड़ दिया जाएगा, यदि वह उस विधि के अधीन ऐसे अपराध के लिए विनिर्दिष्ट कारावास की अधिकतम अवधि की एक-तिहाई विस्तारित अवधि तक निरोध में रह चुका है :
परन्तु यह और कि न्यायालय, लोक अभियोजक की सुनवाई के पश्चात् और उन कारणों से जो उस द्वारा लेखबद्ध किए जाएंगे, ऐसे व्यक्ति के उक्त आधी अवधि से दीर्घतर अवधि के लिए निरोध को जारी रखने का आदेश कर सकेगा या उसके बंधपत्र के बजाय जमानतपत्र पर उसे छोड़ देगा :
परन्तु यह भी कि कोई भी ऐसा व्यक्ति अन्वेषण, जांच या विचारण की अवधि के दौरान उस विधि के अधीन उक्त अपराध के लिए उपबंधित कारावास की अधिकतम अवधि से अधिक के लिए किसी भी मामले में निरुद्ध नहीं रखा जाएगा ।
स्पष्टीकरण—जमानत मंजूर करने के लिए इस धारा के अधीन निरोध की अवधि की गणना करने में अभियुक्त द्वारा कार्यवाही में हुए विलंब के कारण शोगी गई निरोध की अवधि को अपवर्जित किया जाएगा ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, तथा उसके तीसरे परन्तुक के अधीन रहते हुए, जहां किसी व्यक्ति के विरुद्ध या एक से अधिक अपराध या बहू मामले अन्वेषण, जांच या विचारण के लिए लंबित हैं तो उसे न्यायालय द्वारा जमानत पर नहीं छोड़ा जाएगा ।
(3) जेल का अधीक्षक, जहां अभियुक्त व्यक्ति निरुद्ध है, यथास्थिति, उपधारा (1) में उल्लिखित अवधि का आधा या एक-तिहाई पूर्ण होने पर, ऐसे व्यक्ति को जमानत पर छोड़ने के लिए उपधारा (1) के अधीन न्यायालय को कार्यवाही करने के लिए तुरन्त लिखित में आवेदन करेगा ।
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