भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 35/491 / 531
491प्रक्रिया, जब बंधपत्र जब्त कर लिया जाता है
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 363–364स्रोत
(1) जहां—
(क) इस संहिता के अधीन कोई बंधपत्र किसी न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने या सम्पत्ति प्रस्तुत करने के लिए है और उस न्यायालय या किसी ऐसे न्यायालय को, जिसे तत्पश्चात् मामला अंतरित किया गया है, समाधानप्रद रूप में यह साबित कर दिया जाता है कि बंधपत्र जब्त हो चुका है ; या
(ख) इस संहिता के अधीन किसी अन्य बंधपत्र के संबंध में उस न्यायालय को, जिसके द्वारा बंधपत्र लिया गया था, या ऐसे किसी न्यायालय को, जिसे तत्पश्चात् मामला अंतरित किया गया है, या प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट के किसी न्यायालय को, समाधानप्रद रूप में यह साबित कर दिया जाता है कि बंधपत्र जब्त हो चुका है,
वहां न्यायालय ऐसे सबूत के आधारों को अभिलिखित करेगा और ऐसे बंधपत्र से आबद्ध किसी व्यक्ति से अपेक्षा कर सकेगा कि वह उसकी शास्ति दे या कारण दर्शित करे कि वह क्यों नहीं दी जानी चाहिए ।
स्पष्टीकरण—न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने या सम्पत्ति प्रस्तुत करने के लिए बंधपत्र की किसी शर्त का यह अर्थ लगाया जाएगा कि उसके अंतर्गत ऐसे न्यायालय के समक्ष, जिसको तत्पश्चात् मामला अन्तरित किया जाता है, यथास्थिति, उपस्थित होने या सम्पत्ति प्रस्तुत करने की शर्त भी है ।
(2) यदि पर्याप्त कारण दर्शित नहीं किया जाता है और शास्ति नहीं दी जाती है, तो न्यायालय उसकी वसूली के लिए अग्रसर हो सकेगा मानो वह शास्ति इस संहिता के अधीन उसके द्वारा अधिरोपित जुर्माना हो :
परन्तु जहां ऐसी शास्ति नहीं दी जाती है और वह पूर्वोक्त रीति में वसूल नहीं की जा सकती है वहां, प्रतिभू के रूप में इस प्रकार आबद्ध व्यक्ति, उस न्यायालय के आदेश से, जो शास्ति की वसूली का आदेश करता है, सिविल कारागार में कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा ।
(3) न्यायालय ऐसा करने के अपने कारणों को लेखबद्ध करने के पश्चात् उल्लिखित शास्ति के किसी प्रभाग का परिहार और केवल भाग के संदाय का प्रवर्तन कर सकता है ।
(4) जहां बंधपत्र के लिए कोई प्रतिभू बंधपत्र की जब्ती होने के पूर्व मर जाता है वहां उसकी संपदा, बंधपत्र के बारे में सारे दायित्व से उन्मोचित हो जाएगी ।
(5) जहां कोई व्यक्ति, जिसने धारा 125 या धारा 136 या धारा 401 के अधीन प्रतिभूति दी है, किसी ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया जाता है, जिसे करना उसके बंधपत्र की या उसके बंधपत्र के बदले में धारा 494 के अधीन निष्पादित बंधपत्र की शर्तों का भंग होता है, वहां उस न्यायालय के निर्णय की, जिसके द्वारा वह ऐसे अपराध के लिए दोषसिद्ध किया गया था, प्रमाणित प्रतिलिपि उसके प्रतिभू या प्रतिभुओं के विरुद्ध इस धारा के अधीन कार्यवाहियों में साक्ष्य के रूप में उपयोग में लाई जा सकेगी और यदि ऐसी प्रमाणित प्रतिलिपि इस प्रकार उपयोग में लाई जाती है तो, जब तक प्रतिकूल साबित नहीं कर दिया जाता है, न्यायालय यह उपधारणा करेगा कि ऐसा अपराध उसके द्वारा किया गया था ।
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