भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 35/478 / 531
478किन मामलों में जमानत ली जाएगी
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 357स्रोत
(1) जब अजमानतीय अपराध के अभियुक्त व्यक्ति से भिन्न कोई व्यक्ति पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी द्वारा वारंट के बिना गिरफ्तार या निरुद्ध किया जाता है या न्यायालय के समक्ष उपस्थित होता है या लाया जाता है और जब वह ऐसे अधिकारी की अभिरक्षा में है उस बीच किसी समय, या ऐसे न्यायालय के समक्ष कार्यवाहियों के किसी प्रक्रम में, जमानत देने के लिए तैयार है तब ऐसा व्यक्ति जमानत पर छोड़ दिया जाएगा :
परन्तु यदि ऐसा अधिकारी या न्यायालय ठीक समझता है तो वह ऐसे व्यक्ति से जमानतपत्र लेने के बजाय उसे इसमें इसके पश्चात् उपबंधित प्रकार से उसकी उपस्थिति के लिए बंधपत्र निष्पादित करने पर उन्मोचित कर सकेगा यदि ऐसा व्यक्ति निर्धन है और प्रतिभू देने में असमर्थ है, तो उसे ऐसे उन्मोचित करेगा ।
स्पष्टीकरण—जहां कोई व्यक्ति अपनी गिरफ्तारी की तारीख के एक सप्ताह के भीतर जमानतपत्र देने में असमर्थ है वहां अधिकारी या न्यायालय के लिए यह उपधारणा करने का पर्याप्त आधार होगा कि वह इस परन्तुक के प्रयोजनों के लिए निर्धन व्यक्ति है :
परन्तु यह और कि इस धारा की कोई बात धारा 135 की उपधारा (3) या धारा 492 के उपबंधों पर प्रभाव डालने वाली नहीं समझी जाएगी ।
(2) उपधारा (1) में किसी बात के होते हुए भी, जहां कोई व्यक्ति, उपस्थिति के समय और स्थान के बारे में बंधपत्र या जमानतपत्र की शर्तों का अनुपालन करने में असफल रहता है वहां न्यायालय उसे, जब वह उसी मामले में किसी पश्चात्वर्ती अवसर पर न्यायालय के समक्ष उपस्थित होता है या अभिरक्षा में लाया जाता है, जमानत पर छोड़ने से इंकार कर सकेगा और ऐसी किसी इंकारी का, ऐसे बंधपत्र या जमानतपत्र से आबद्ध किसी व्यक्ति से धारा 491 के अधीन उसको शास्ति देने की अपेक्षा करने की न्यायालय की शक्तियों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा ।
यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।