भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 35/483 / 531
483जमानत के बारे में उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय की विशेष शक्तियां
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 361स्रोत
(1) उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय यह निदेश दे सकेगा कि,—
(क) किसी ऐसे व्यक्ति को, जिस पर किसी अपराध का अभियोग है और जो अभिरक्षा में है, जमानत पर छोड़ दिया जाए और यदि अपराध धारा 480 की उपधारा (3) में विनिर्दिष्ट प्रकार का है, तो वह ऐसी कोई शर्त जिसे वह उस उपधारा में वर्णित प्रयोजनों के लिए आवश्यक समझे, अधिरोपित कर सकेगा ;
(ख) किसी व्यक्ति को जमानत पर छोड़ने के समय मजिस्ट्रेट द्वारा अधिरोपित कोई शर्त अपास्त या उपांतरित कर दी जाए :
परन्तु उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय किसी ऐसे व्यक्ति की, जो ऐसे अपराध का अभियुक्त है जो अनन्यतः सेशन न्यायालय द्वारा विचारणीय है, या जो यद्यपि इस प्रकार विचारणीय नहीं है, आजीवन कारावास से दंडनीय है, जमानत लेने के पूर्व जमानत के लिए आवेदन की सूचना लोक अभियोजक को उस दशा के सिवाय देगा जब उसकी, ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, यह राय है कि ऐसी सूचना देना साध्य नहीं हैः
परंतु यह और कि उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय किसी ऐसे व्यक्ति को जमानत देने से पूर्व जो, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 65 या धारा 70 की उपधारा (2) के अधीन विचारण योग्य किसी अपराध का अभियुक्त है, ऐसे आवेदन की सूचना की प्राप्ति की तारीख से पन्द्रह दिन की अवधि के भीतर लोक अभियोजक को जमानत के लिए आवेदन की सूचना देगा ।
(2) सूचना देने वाले या उसके द्वारा प्राधिकृत किसी व्यक्ति की उपस्थिति भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 65 या धारा 70 की उपधारा (2) के अधीन किसी व्यक्ति को जमानत के लिए आवेदन की सुनवाई करते समय बाध्यकारी होगी ।
(3) उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय, किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसे इस अध्याय के अधीन जमानत पर छोड़ा जा चुका है, गिरफ्तार करने का निदेश दे सकेगा और उसे अभिरक्षा के लिए सुपुर्द कर सकेगा ।
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