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भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 9/127 / 170

127न्यायाधीश और मजिस्ट्रेट

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 522स्रोत

पुराना कानून

भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872

आईईए से मिलान जल्द

कोई भी न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट, न्यायालय में ऐसे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के नाते अपने स्वयं के आचरण के बारे में, या ऐसी किसी बात के बारे में, जिसका ज्ञान उसे ऐसे न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट के नाते न्यायालय में हुआ, किन्हीं प्रश्नों का उत्तर देने के लिए ऐसे किसी भी न्यायालय के विशेष आदेश के सिवाय, जिसके वह अधीनस्थ है, विवश नहीं किया जाएगा, किन्तु अन्य बातों के बारे में, जो उसकी उपस्थिति में उस समय घटित हुई थीं, जब वह ऐसे कार्य कर रहा था उसकी परीक्षा की जा सकेगी ।

दृष्टांत

(क) सेशन न्यायालय के समक्ष अपने विचारण में क कहता है कि मजिस्ट्रेट ख द्वारा अभिसाक्ष्य अनुचित रूप से लिया गया था । इसके बारे में प्रश्नों का उत्तर देने के लिए क को किसी वरिष्ठ न्यायालय के विशेष आदेश के सिवाय, विवश नहीं किया जा सकता ।

(ख) मजिस्ट्रेट ख के समक्ष मिथ्या साक्ष्य देने का क सेशन न्यायालय के समक्ष अभियुक्त है । वरिष्ठ न्यायालय के विशेष आदेश के सिवाय, ख से यह नहीं पूछा जा सकता कि क ने क्या कहा था ।

(ग) क सेशन न्यायालय के समक्ष इसलिए अभियुक्त है कि उसने सेशन न्यायाधीश ख के समक्ष विचारित होते समय किसी पुलिस अधिकारी की हत्या करने का प्रयत्न किया । ख की यह परीक्षा की जा सकेगी कि क्या घटित हुआ था ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।