भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 9/132 / 170
132वृत्तिक संसूचनाएं
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 522–523स्रोत
पुराना कानून
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
आईईए से मिलान जल्द(1) कोई भी अधिवक्ता अपने मुवक्किल की अभिव्यक्त सम्मति के सिवाय, ऐसी किसी संसूचना को प्रकट करने के लिए, जो उसके ऐसे अधिवक्ता की हैसियत में सेवा के अनुक्रम में और उसके प्रयोजन के लिए उसके मुवक्किल द्वारा, या उसकी ओर से उसे दी गई है या किसी दस्तावेज की, जिससे वह अपनी वृत्तिक सेवा के अनुक्रम में और उसके प्रयोजन के लिए परिचित हो गया है, अन्तर्वस्तु या दशा कथित करने को या किसी सलाह को, जो ऐसी सेवा के अनुक्रम में और उसके प्रयोजन के लिए उसने अपने मुवक्किल को दी है, प्रकट करने के लिए किसी भी समय अनुज्ञात नहीं किया जाएगा :
परन्तु इस धारा की कोई भी बात निम्नलिखित बात को प्रकटीकरण से संरक्षण नहीं देगी—
(क) किसी भी अवैध प्रयोजन को अग्रसर करने में दी गई कोई भी ऐसी संसूचना ;
(ख) ऐसा कोई भी तथ्य जो किसी अधिवक्ता ने अपनी ऐसी हैसियत में सेवा के अनुक्रम में अवलोकन किया हो, और जिससे दर्शित हो कि उसकी सेवा के प्रारम्भ के पश्चात् कोई अपराध या कपट किया गया है ।
(2) यह तत्वहीन है कि उपधारा (1) के परंतुक में निर्दिष्ट ऐसे अधिवक्ता का ध्यान ऐसे तथ्य के प्रति उसके मुवक्किल के द्वारा या उसकी ओर से आकर्षित किया गया था या नहीं ।
स्पष्टीकरण—इस धारा में कथित बाध्यता वृत्तिक सेवा के समाप्त हो जाने के पश्चात् भी बनी रहती है ।
दृष्टांत
(क) मुवक्किल क, अधिवक्ता ख से कहता है, “मैंने कूटरचना की है और में चाहता हूं कि आप मेरी प्रतिरक्षा करें” । यह संसूचना प्रकटन से संरक्षित है, क्योंकि ऐसे व्यक्ति की प्रतिरक्षा करना आपराधिक प्रयोजन नहीं है, जिसका दोषी होना ज्ञात हो ।
(ख) मुवक्किल क, अधिवक्ता ख से कहता है, “मैं संपत्ति पर कब्जा कूटरचित विलेख के उपयोग द्वारा अभिप्राप्त करना चाहता हूं और इस आधार पर वाद लाने की मैं आपसे प्रार्थना करता हूं । यह संसूचना आपराधिक प्रयोजन को अग्रसर करने में की गई होने से प्रकटन से संरक्षित नहीं है ।
(ग) क पर गबन का आरोप लगाए जाने पर वह अपनी प्रतिरक्षा करने के लिए अधिवक्ता ख को रखता है । कार्यवाहियों के अनुक्रम में ख देखता है कि क की लेखाबही में यह प्रविष्टि की गई है कि क द्वारा उतनी रकम देनी है, जितनी के बारे में अभिकथित है कि उसका गबन किया गया है, जो प्रविष्टि उसकी वृत्तिक सेवा के आरम्भ के समय उस बही में नहीं थी । यह ख द्वारा अपनी सेवा के अनुक्रम में अवलोकित ऐसा तथ्य होने के कारण, जिससे दर्शित होता है कि कपट उस कार्यवाही के प्रारम्भ होने के पश्चात् किया गया है, प्रकटन से संरक्षित नहीं है ।
(3) इस धारा के उपबंध अधिवक्ताओं के निर्वचनकर्ताओं और लिपिकों या कर्मचारियों को लागू होंगे ।
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