भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 13/208 / 358
208लोक सेवक का आदेश न मानकर अनुपस्थित रहना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 91स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्दजो कोई, किसी लोक सेवक द्वारा निकाले गए उस समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा के पालन में, जिसे ऐसे लोक सेवक के नाते निकालने के लिए वह वैध रूप से सक्षम हो, किसी निश्चित स्थान और समय पर स्वयं या अभिकर्ता द्वारा उपस्थित होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उस स्थान या समय पर उपस्थित होने का साशय लोप करता है, या उस स्थान से, जहां उपस्थित होने के लिए वह आबद्ध है, उस समय से पूर्व चला जाता है, जिस समय चला जाना उसके लिए विधिपूर्ण होता,—
(क) वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि एक मास तक की हो सकेगी या जुर्माने से, जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ;
(ख) जहां समन, सूचना, आदेश या उद्घोषणा किसी न्यायालय में स्वयं या किसी अभिकर्ता द्वारा उपस्थित होने के लिए है, तो वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा । दृष्टांत
(क) क, उच्च न्यायालय द्वारा निकाले गए उपस्थिति-आदेश के पालन में उस न्यायालय के समक्ष उपस्थित होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उपस्थित होने में साशय लोप करता है । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
(ख) क, जिला न्यायाधीश द्वारा निकाले गए समन के पालन में उस जिला न्यायाधीश के समक्ष साक्षी के रूप में उपस्थित होने के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए, उपस्थित होने में साशय लोप करता है । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
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