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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 13/212 / 358

212मिथ्या सूचना देना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 92–93स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

जो कोई, किसी लोक सेवक को, ऐसे लोक सेवक के नाते, किसी विषय पर सूचना देने के लिए विधिक रूप से आबद्ध होते हुए, उस विषय पर सच्ची सूचना के रूप में ऐसी सूचना देता है, जिसका मिथ्या होना वह जानता है या जिसके मिथ्या होने का विश्वास करने का कारण उसके पास है,—

(क) वह सादा कारावास से, जिसकी अवधि छह मास तक की हो सकेगी, या जुर्माने से जो पांच हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा :

(ख) वह सूचना, जिसे देने के लिए वह विधिक रूप से आबद्ध है, कोई अपराध किए जाने के विषय में हो, या किसी अपराध के किए जाने का निवारण करने के प्रयोजन से, या किसी अपराधी को पकड़ने के लिए अपेक्षित हो, तो वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दो वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा । दृष्टांत

(क) क, एक भू-धारक, यह जानते हुए कि उसकी भू-सम्पदा की सीमाओं के अंदर एक हत्या की गई है, उस जिले के मजिस्ट्रेट को जानबूझकर यह मिथ्या सूचना देता है कि मृत्यु सांप के काटने के परिणामस्वरूप दुर्घटना से हुई है । क इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है ।

(ख) क, जो ग्राम चौकीदार है, यह जानते हुए कि अनजाने लोगों का एक बड़ा गिरोह य के घर में, जो पड़ोस के गांव का निवासी एक धनी व्यापारी है, डकैती करने के लिए उसके गांव से होकर गया है और निकटतम पुलिस थाने के अधिकारी को उपरोक्त घटना की सूचना शीघ्र और ठीक समय पर देने के लिए विधिक रूप से आबद्ध होते हुए, पुलिस अधिकारी को जानबूझकर यह मिथ्या सूचना देता है कि संदिग्ध शील के लोगों का एक गिरोह किसी भिन्न दिशा में स्थित एक दूरस्थ स्थान पर डकैती करने के लिए गांव से होकर गया है । यहां क, इस धारा में परिभाषित अपराध का दोषी है ।

स्पष्टीकरण—धारा 211 में और इस धारा में, “अपराध” शब्द के अंतर्गत भारत से बाहर किसी स्थान पर किया गया कोई ऐसा कार्य आता है, जो यदि भारत में किया जाता, तो निम्नलिखित धारा अर्थात् धारा 103, धारा 105, धारा 307, धारा 309 की उपधारा (2), उपधारा (3) और उपधारा (4), धारा 340 की उपधारा (2), उपधारा (3), उपधारा (4) और उपधारा (5), धारा 311, धारा 312, धारा 326 के खंड (च) और खंड (छ), धारा 331 की उपधारा (4), उपधारा (6), उपधारा (7) और उपधारा (8), धारा 332 के खंड (क) और खंड (ख) में से किसी धारा के अधीन दंडनीय होता ; और “अपराधी” शब्द के अंतर्गत कोई भी ऐसा व्यक्ति आता है, जो कोई ऐसा कार्य करने का दोषी अभिकथित हो ।

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