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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 13/217 / 358

217इस आशय से मिथ्या सूचना देना कि लोक सेवक अपनी विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग दूसरे व्यक्ति को क्षति करने के लिए करे

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 94स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

जो कोई, किसी लोक सेवक को कोई ऐसी सूचना, जिसके मिथ्या होने का उसे ज्ञान या विश्वास है, इस आशय से देता है कि वह उस लोक सेवक को प्रेरित करे या यह सम्भाव्य जानते हुए देता है कि वह उसको उसके द्वारा प्रेरित करेगा कि वह लोक सेवक—

(क) कोई ऐसी बात करे या करने का लोप करे जिसे वह लोक सेवक, यदि उसे उस संबंध में, जिसके बारे में ऐसी सूचना दी गई है, तथ्यों की सही स्थिति का पता होता तो न करता या करने का लोप न करता ; या

(ख) ऐसे लोक सेवक की विधिपूर्ण शक्ति का उपयोग करे जिस उपयोग से किसी व्यक्ति को क्षति या क्षोभ हो,

वह दोनों में से, किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि एक वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, जो दस हजार रुपए तक का हो सकेगा, या दोनों से, दंडित किया जाएगा ।

दृष्टांत

(क) क, एक मजिस्ट्रेट को यह सूचना देता है कि य एक पुलिस अधिकारी, जो ऐसे मजिस्ट्रेट का अधीनस्थ है, कर्तव्य पालन में उपेक्षा या अवचार का दोषी है, यह जानते देता है कि ऐसी सूचना मिथ्या है, और यह सम्भाव्य है कि उस सूचना से वह मजिस्ट्रेट, य को पदच्युत कर देगा । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।

(ख) क, एक लोक सेवक को यह मिथ्या सूचना देता है कि य के पास गुप्त स्थान में निषिद्ध नमक है । वह सूचना यह जानते हुए देता है कि ऐसी सूचना मिथ्या है, और यह जानते हुए देता है कि यह सम्भाव्य है कि उस सूचना के परिणामस्वरूप य के परिसर की तलाशी ल्ली जाएगी, जिससे य को क्षोभ होगा । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।

(ग) एक पुलिस को, क यह मिथ्या सूचना देता है कि एक विशिष्ट ग्राम के पास उस पर हमला किया गया है और उसे लूट लिया गया है । वह अपने पर हमलावर के रूप में किसी व्यक्ति का नाम नहीं लेता । किन्तु वह जानता है कि यह संभाव्य है कि इस सूचना के परिणामस्वरूप पुलिस उस ग्राम में जांच करेगी और तलाशियां लेगी, जिससे ग्रामवासियों या उनमें से कुछ को क्षोभ होगा । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।