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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 26/346 / 531

346कार्यवाहियों को स्थगित या आस्थगित करने की शक्ति

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 301–302स्रोत

(1) प्रत्येक जांच या विचारण में कार्यवाहियां सभी उपस्थित साक्षियों की परीक्षा हो जाने तक दिन-प्रतिदिन जारी रखी जाएंगी, जब तक कि ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, न्यायालय उन्हें अगले दिन से परे आस्थगित करना आवश्यक न समझे :

परन्तु जब जांच या विचारण भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 70 या धारा 71 के अधीन किसी अपराध से संबंधित है, तब जांच या विचारण, आरोप पत्र फाइल किए जाने की तारीख से दो मास की अवधि के भीतर पूरा किया जाएगा ।

(2) यदि न्यायालय किसी अपराध का संज्ञान करने या विचारण के प्रारंभ होने के पश्चात् यह आवश्यक या उचित समझता है कि किसी जांच या विचारण का प्रारंभ करना विलंबित कर दिया जाए या उसे स्थगित कर दिया जाए तो वह, समय-समय पर, ऐसे कारणों से, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, ऐसे निबन्धनों पर, जैसे वह ठीक समझे, उतने समय के लिए जितना वह उचित समझे उसे स्थगित या आस्थगित कर सकेगा और यदि अभियुक्त अभिरक्षा में है तो उसे वारंट द्वारा प्रतिप्रेषित कर सकेगा :

परन्तु कोई न्यायालय किसी अभियुक्त को इस धारा के अधीन एक समय में पन्द्रह दिन से अधिक की अवधि के लिए अभिरक्षा में प्रतिप्रेषित नहीं करेगा :

परन्तु यह और कि जब साक्षी उपस्थित हों तब उनकी परीक्षा किए बिना स्थगन या आस्थगन करने की मंजूरी विशेष कारणों के बिना, जो लेखबद्ध किए जाएंगे, नहीं दी जाएगी :

परन्तु यह भी कि कोई स्थगन केवल इस प्रयोजन के लिए नहीं मंजूर किया जाएगा कि वह अभियुक्त व्यक्ति को उस पर अधिरोपित किए जाने के लिए प्रस्थापित दंडादेश के विरुद्ध हेतुक दर्शित करने में समर्थ बनाए :

परंतु यह भी कि-

(क) कोई भी स्थगन किसी पक्षकार के अनुरोध पर तभी मंजूर किया जाएगा, जब परिस्थितियां उस पक्षकार के नियंत्रण से परे हों ;

(ख) जहां परिस्थितियां पक्षकार के नियंत्रण से बाहर है, न्यायालय द्वारा अन्य पक्षकारों के आक्षेपों की सुनवाई के पश्चात् और ऐसे कारणों से जो अभिलिखित किए जाएं, दो से अनधिक आस्थगन प्रदान किए जा सकेंगे;

(ग) यह तथ्य कि पक्षकार का अधिवक्ता किसी अन्य न्यायालय में व्यस्त है, स्थगन के लिए आधार नहीं होगा ;

(घ) जहां साक्षी न्यायालय में उपस्थित है किंतु पक्षकार या उसका अधिवक्ता उपस्थित नहीं है या पक्षकार या उसका अधिवक्ता न्यायालय में उपस्थित तो है, किंतु साक्षी की परीक्षा या प्रतिपरीक्षा करने के लिए तैयार नहीं है, वहां यदि न्यायालय ठीक समझता है तो वह साक्षी का कथन अभिलिखित कर सकेगा और ऐसे आदेश पारित कर सकेगा, जो, यथास्थिति, साक्षी की मुख्य परीक्षा या पुनः वापस से छूट देने के लिए ठीक समझे ।

स्पष्टीकरण -यदि यह संदेह करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त कर लिया गया

है कि हो सकता है कि अभियुक्त ने अपराध किया है और यह संभाव्य प्रतीत होता है कि प्रतिप्रेषण करने पर अतिरिक्त साक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है तो यह प्रतिप्रेषण के लिए एक उचित कारण होगा ।

स्पष्टीकरण 2-जिन निबंधनों पर कोई आस्थगन या स्थगन करना मंजूर किया जा सकता है, उनके अन्तर्गत समुचित मामलों में अभियोजन या अभियुक्त द्वारा खर्चों का दिया जाना भी है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।