भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 26/363 / 531
363सिक्के, स्टाम्प विधि या सम्पत्ति के विरुद्ध अपराधों के लिए पूर्व में दोषसिद्ध व्यक्तियों का विचारण
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 312–313स्रोत
(1) जहां कोई व्यक्ति भारतीय न्याय संहिता, 2023 के अध्याय 10 या अध्याय 17 के अधीन तीन वर्ष या अधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय अपराध के लिए दोषसिद्ध किए जा चुकने पर उन अध्यायों में से किसी के अधीन तीन वर्ष या अधिक की अवधि के लिए कारावास से दंडनीय किसी अपराध के लिए पुनः अभियुक्त है, और उस मजिस्ट्रेट का, जिसके समक्ष मामला लंबित है, समाधान हो जाता है कि यह उपधारणा करने के लिए आधार है कि ऐसे व्यक्ति ने अपराध किया है तो वह उस दशा के सिवाय विचारण के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेजा जाएगा या सेशन न्यायालय के सुपुर्द किया जाएगा, जब मजिस्ट्रेट मामले का विचारण करने के लिए सक्षम है और उसकी यह राय है कि यदि अभियुक्त दोषसिद्ध किया गया तो वह स्वयं उसे पर्याप्त दंड का आदेश दे सकता है ।
(2) जब उपधारा (1) के अधीन कोई व्यक्ति विचारण के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेजा जाता है या सेशन न्यायालय को सुपुर्द किया जाता है तब कोई अन्य व्यक्ति, जो उसी जांच या विचारण में उसके साथ संयुक्ततः अभियुक्त है, वैसे ही भेजा जाएगा या सुपुर्द किया जाएगा जब तक ऐसे अन्य व्यक्ति को मजिस्ट्रेट, यथास्थिति, धारा 262 या धारा 268 के अधीन उन्मोचित न कर दे ।
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