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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 26/355 / 531

355कुछ मामलों में अभियुक्त की अनुपस्थिति में जांच और विचारण किए जाने के लिए उपबंध

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 304–305स्रोत

(1) इस संहिता के अधीन जांच या विचारण के किसी प्रक्रम में यदि न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट का उन कारणों से, जो अभिलिखित किए जाएंगे, समाधान हो जाता है कि न्यायालय के समक्ष अभियुक्त की वैयक्तिक उपस्थिति न्याय के हित में आवश्यक नहीं है या अभियुक्त न्यायालय की कार्यवाहियों में बार-बार विघ्न डालता है तो, ऐसे अभियुक्त का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता द्वारा किए जाने की दशा में, वह न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट उसकी उपस्थिति से उसे अभिमुक्ति दे सकेगा और उसकी अनुपस्थिति में ऐसी जांच या विचारण करने के लिए अग्रसर हो सकेगा और कार्यवाहियों के किसी पश्चात्वर्ती प्रक्रम में ऐसे अभियुक्त की वैयक्तिक उपस्थिति का निदेश दे सकेगा ।

(2) यदि ऐसे किसी मामले में अभियुक्त का प्रतिनिधित्व अधिवक्ता द्वारा नहीं किया जा रहा है या यदि न्यायाधीश या मजिस्ट्रेट का यह विचार है कि अभियुक्त की वैयक्तिक उपस्थिति आवश्यक है तो, यदि वह ठीक समझे तो, उन कारणों से, जो उसके द्वारा लेखबद्ध किए जाएंगे, वह या तो ऐसी जांच या विचारण आस्थगित कर सकेगा या आदेश दे सकेगा कि ऐसे अभियुक्त का मामला अलग से लिया जाए या विचारित किया जाए ।

स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजनों के लिए, अभियुक्त की वैयक्तिक उपस्थिति में श्रव्य-दृश्य इलैक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से उपस्थिति भी सम्मिलित है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।