भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 26/364 / 531
364प्रक्रिया जब मजिस्ट्रेट पर्याप्त कठोर दंड का आदेश नहीं दे सकता
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 313स्रोत
(1) जब कभी अभियोजन और अभियुक्त का साक्ष्य सुनने के पश्चात् मजिस्ट्रेट की यह राय है कि अभियुक्त दोषी है और उसे उस प्रकार के दंड से भिन्न प्रकार का दंड या उस दंड से अधिक कठोर दंड, जो वह मजिस्ट्रेट देने के लिए सशक्त है, दिया जाना चाहिए या द्वितीय वर्ग मजिस्ट्रेट होते हुए उसकी यह राय है कि अभियुक्त से धारा 125 के अधीन बंधपत्र या जमानतपत्र निष्पादित करने की अपेक्षा की जानी चाहिए तब वह अपनी राय अभिलिखित कर सकेगा और कार्यवाहियों तथा अभियुक्त को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को, जिसके वह अधीनस्थ हो, भेज सकेगा ।
(2) जब एक से अधिक अभियुक्त व्यक्तियों का विचारण एक साथ किया जा रहा है और मजिस्ट्रेट ऐसे अभियुक्तों में से किसी के बारे में उपधारा (1) के अधीन कार्यवाही करना आवश्यक समझता है तब वह उन सभी अभियुक्तों को, जो उसकी राय में दोषी हैं, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को भेज देगा ।
(3) यदि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, जिसके पास कार्यवाहियों भेजी जाती है, ठीक समझता है तो पक्षकारों की परीक्षा कर सकेगा और किसी साक्षी को, जो पहले ही मामले में साक्ष्य दे चुका है, पुनः बुला सकता है और उसकी परीक्षा कर सकता है और कोई अतिरिक्त साक्ष्य मांग सकेगा और ले सकेगा और मामले में ऐसा निर्णय, दंडादेश या आदेश देगा, जो वह ठीक समझता है और जो विधि के अनुसार है ।
यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।