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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 26/359 / 531

359अपराधों का शमन

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 307–311स्रोत

(1) नीचे दी गई सारणी के प्रथम दो स्तम्भों में विनिर्दिष्ट भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं के अधीन दंडनीय अपराधों का शमन उस सारणी के तृतीय स्तम्भ में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा किया जा सकेगा :—

सारणी
अपराधभारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा जो लागू होती हैवह व्यक्ति जिसके द्वारा अपराध का शमन किया जा सकेगा
123
किसी विवाहित महिला को आपराधिक दुराशय से फुसलाकर ले जाना या ले जाना या निरुद्ध रखना ।84महिला का पति और महिला
स्वेच्छया उपहति कारित करना ।115(2)वह व्यक्ति जिसे उपहति कारित की गई है ।
प्रकोपन पर स्वेच्छया उपहति कारित करना ।122(1)वह व्यक्ति जिसे उपहति कारित की गई है ।
गंभीर और अचानक प्रकोपन पर स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना ।122(2),वह व्यक्ति जिसे उपहति कारित की गई है ।
किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध या परिरोध ।126(2) 127(2)वह व्यक्ति जो अवरुद्ध या परिरुद्ध किया गया है ।
किसी व्यक्ति का तीन या अधिक दिनों के लिए सदोष परिरोध ।127(3)परिरुद्ध व्यक्ति ।
किसी व्यक्ति का दस या अधिक दिनों के लिए सदोष परिरोध ।127(4)परिरुद्ध व्यक्ति ।
किसी व्यक्ति का गुप्त स्थान में सदोष परिरोध ।127(6)परिरुद्ध व्यक्ति ।
हमला या आपराधिक बल का प्रयोग ।131, 133, 136वह व्यक्ति जिस पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग किया गया है ।
किसी व्यक्ति की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के विमर्शित आशय से शब्द उच्चारित करना, आदि ।302वह व्यक्ति जिसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचना आशयित है ।
चोरी ।303(2)चुराई हुई संपत्ति का स्वामी ।
संपत्ति का बेईमानी से दुर्विनियोग ।314दुर्विनियोजित संपत्ति का स्वामी ।
वाहक, घाटवाल, आदि द्वारा आपराधिक न्यास-भंग ।316(3)उस संपत्ति का स्वामी, जिसके संबंध में न्यास-भंग किया गया है ।
चुराई हुई संपत्ति को, उसे चुराई हुई जानते हुए बेईमानी से प्राप्त करना ।317(2)चुराई हुई संपत्ति का स्वामी ।
चुराई हुई संपत्ति को, यह जानते हुए कि वह चुराई हुई है, छिपाने में या व्ययनित करने में सहायता करना ।317(5)चुराई हुई संपत्ति का स्वामी ।
छल ।318(2)वह व्यक्ति जिससे छल किया गया है।
प्रतिरूपण द्वारा छल ।319(2)वह व्यक्ति जिससे छल किया गया है ।
लेनदारों में वितरण निवारित करने के लिए संपत्ति आदि का कपटपूर्वक अपसारण या छिपाना ।320उससे प्रभावित लेनदार ।
अपराधी का अपने को शोध्य ऋण या मांग का लेनदारों के लिए उपलब्ध किया जाना कपटपूर्वक निवारित करना ।321उससे प्रभावित लेनदार ।
अंतरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के संबंध में मिथ्या कथन अंतर्विष्ट है, कपटपूर्वक निष्पादन ।322उससे प्रभावित व्यक्ति ।
संपत्ति का कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जाना ।323उससे प्रभावित व्यक्ति ।
रिष्टि, जब कारित हानि या नुकसान केवल प्राइवेट व्यक्ति को हुई हानि या नुकसान है ।324(2), 324(4)वह व्यक्ति, जिसे हानि या नुकसान हुआ है ।
जीवजन्तु का वध करने या उसे विकलांग करने के द्वारा रिष्टि ।325जीवजन्तु का स्वामी ।
सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने के द्वारा रिष्टि, जब उससे कारित हानि या नुकसान केवल प्राइवेट व्यक्ति को हुई हानि या नुकसान है ।326(क)वह व्यक्ति, जिसे हानि या नुकसान हुआ है ।
आपराधिक अतिचार ।329(3)वह व्यक्ति जिसके कब्जे में ऐसी संपत्ति है जिस पर अतिचार किया गया है ।
गृह-अतिचार ।329(4)वह व्यक्ति जिसके कब्जे में ऐसी संपत्ति है जिस पर अतिचार किया गया है ।
कारावास से दंडनीय अपराध को (चोरी से भिन्न) करने के लिए गृह-अतिचार ।332(ग)वह व्यक्ति जिसका उस गृह पर कब्जा है जिस पर अतिचार किया गया है ।
मिथ्या व्यापार या संपत्ति चिह्न का उपयोग ।345(3)वह व्यक्ति, जिसे ऐसे उपयोग से हानि या क्षति कारित हुई है ।
अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाए गए संपत्ति चिह्न का कूटकरण ।347(1)वह व्यक्ति, जिसे ऐसे उपयोग से हानि या क्षति कारित हुई है ।
कूटकृत संपत्ति चिह्न के साथ चिह्नित माल का विक्रय ।349वह व्यक्ति, जिसे ऐसे उपयोग से हानि या क्षति कारित हुई है ।
अपराधिक अभित्रास ।351(2), 351(3)अभित्रस्त व्यक्ति ।
लोक-शांति भंग कराने को प्रकोपित करने के आशय से अपमान ।352अपमानित व्यक्ति ।
किसी व्यक्ति को यह विश्वास करने के लिए उत्प्रेरित करके कि वह दैवी अप्रसाद का भाजन होगा, कराया गया कार्य ।354वह व्यक्ति जिसे उत्प्रेरित किया गया ।
उपधारा (2) के अधीन सारणी के स्तंभ (1) में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 356(2) के सामने यथाविनिर्दिष्ट ऐसे मामलों के सिवाय, मानहानि ।356(2)वह व्यक्ति जिसकी मानहानि की गई है ।
मानहानिकारक जानी हुई बात को मुद्रित या उत्कीर्ण करना ।356(3)वह व्यक्ति जिसकी मानहानि की गई है ।
मानहानिकारक विषय रखने वाले मुद्रित या उत्कीर्ण पदार्थ का यह जानते हुए बेचना कि उसमें ऐसा विषय अंतर्विष्ट है ।356(4)वह व्यक्ति जिसकी मानहानि की गई है ।
सेवा संविदा का आपराधिक भंग357वह व्यक्ति जिसके साथ अपराधी ने संविदा की है ।

(2) नीचे दी गई सारणी के प्रथम दो स्तम्भों में विनिर्दिष्ट भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं के अधीन दंडनीय अपराधों का शमन उस न्यायालय की अनुज्ञा से, जिसके समक्ष ऐसे अपराध के लिए कोई अभियोजन लंबित है, उस सारणी के तृतीय स्तंभ में उल्लिखित व्यक्तियों द्वारा किया जा सकेगा :—

सारणी
अपराधभारतीय न्याय संहिता की धारा जो लागू होती हैवह व्यक्ति जिसके द्वारा अपराध शमन किया जा सकता है
123
शब्द, अंगविक्षेप या कार्य, जो किसी महिला की लज्जा का अनादर करने के लिए आशयित है ।79वह महिला जिसका अनादर करना आशयित था या जिसकी एकांतता का अतिक्रमण किया गया था ।
पति या पत्नी के जीवनकाल में पुनः विवाह करना ।82(1)ऐसे विवाह करने वाले व्यक्ति का पति या पत्नी ।
गर्भपात कारित करना ।88वह महिला जिसका गर्भपात किया गया है ।
स्वेच्छया घोर उपहति कारित करना ।117(2)वह व्यक्ति जिसे उपहति कारित की गई है ।
उतावलेपन और उपेक्षा से किसी कार्य द्वारा उपहति कारित करना जिससे मानव जीवन या दूसरों का वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए ।125(क)वह व्यक्ति जिसे उपहति कारित की गई है ।
उतावलेपन और उपेक्षा से किसी कार्य द्वारा घोर उपहति कारित करना जिससे मानव जीवन या दूसरों का वैयक्तिक क्षेम संकटापन्न हो जाए ।125(ख)वह व्यक्ति जिसे उपहति कारित की गई है ।
किसी व्यक्ति का सदोष परिरोध करने के प्रयत्न में हमला या आपराधिक बल का प्रयोग ।135वह व्यक्ति जिस पर हमला किया गया या जिस पर बल का प्रयोग किया गया था ।
लिपिक या सेवक द्वारा स्वामी के कब्जे की संपत्ति की चोरी ।306चुराई हुई संपत्ति का स्वामी ।
आपराधिक न्यास-भंग ।316(2)उस संपत्ति का स्वामी, जिसके संबंध में न्यास-भंग किया गया है ।
लिपिक या सेवक द्वारा आपराधिक न्यास-भंग ।316(4)उस संपत्ति का स्वामी, जिसके संबंध में न्यास-भंग किया गया है ।
ऐसे व्यक्ति के साथ छल करना जिसका हित संरक्षित रखने के लिए अपराधी या तो विधि द्वारा या वैध संविदा द्वारा आबद्ध था ।318(3)वह व्यक्ति, जिससे छल किया गया है ।
छल करना या संपत्ति परिदत्त करने या मूल्यवान प्रतिभूति की रचना करने या उसे परिवर्तित या नष्ट करने के लिए बेईमानी से उत्प्रेरित करना ।318(4)वह व्यक्ति, जिससे छल किया गया है ।
राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति या राज्य के राज्यपाल अथवा संघ राज्यक्षेत्र के प्रशासक या किसी मंत्री के विरुद्ध उसके लोक कृत्यों के संबंध में मानहानि, जब लोक अभियोजक द्वारा किए गए परिवाद पर संस्थित की जाए ।356(2)वह व्यक्ति जिसकी मानहानि की गई है ।

(3) जब कोई अपराध इस धारा के अधीन शमनीय है, तब ऐसे अपराध के दुष्प्रेरण का, या ऐसे अपराध को करने के प्रयत्न का (जब ऐसा प्रयत्न स्वयं अपराध हो) या जहां अभियुक्त भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 3 की उपधारा (5) या धारा 190 के अधीन दायी हो, शमन उसी प्रकार से किया जा सकेगा ।

(4) (क) जब वह व्यक्ति, जो इस धारा के अधीन अपराध का शमन करने के लिए अन्यथा सक्षम होता, बालक है या विकृतचित्त है, तब कोई व्यक्ति जो उसकी ओर से संविदा करने के लिए सक्षम हो, न्यायालय की अनुज्ञा से, ऐसे अपराध का शमन कर सकेगा ।

(ख) जब वह व्यक्ति, जो इस धारा के अधीन अपराध का शमन करने के लिए अन्यथा सक्षम होता, मर जाता है तब ऐसे व्यक्ति का, सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में यथापरिभाषित, विधिक प्रतिनिधि, न्यायालय की सम्मति से, ऐसे अपराध का शमन कर सकेगा ।

(5) जब अभियुक्त विचारणार्थ सुपुर्द कर दिया जाता है या जब वह दोषसिद्ध कर दिया जाता है और अपील लंबित है, तब अपराध का शमन, यथास्थिति, उस न्यायालय की इजाजत के बिना अनुज्ञात नहीं किया जाएगा जिसे वह सुपुर्द किया गया है, या जिसके समक्ष अपील सुनी जानी है ।

(6) धारा 442 के अधीन पुनरीक्षण की अपनी शक्तियों के प्रयोग में कार्य करते हुए उच्च न्यायालय या सेशन न्यायालय किसी व्यक्ति को किसी ऐसे अपराध का शमन करने की अनुज्ञा दे सकेगा जिसका शमन करने के लिए वह व्यक्ति इस धारा के अधीन सक्षम है ।

(7) यदि अभियुक्त पूर्व दोषसिद्धि के कारण किसी अपराध के लिए या तो वर्धित दंड से या भिन्न किस्म के दंड से दंडनीय है तो ऐसे अपराध का शमन नहीं किया जाएगा ।

(8) इस धारा के अधीन अपराध के शमन का प्रभाव उस अभियुक्त की दोषमुक्ति होगा जिससे अपराध का शमन किया गया है ।

(9) अपराध का शमन इस धारा के उपबंधों के अनुसार ही किया जाएगा, अन्यथा नहीं ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।