भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 6/88 / 531
88कुर्क की हुई संपत्ति को निर्मुक्त करना, विक्रय और वापस करना
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 189स्रोत
(1) यदि उद्घोषित व्यक्ति उद्घोषणा में विनिर्दिष्ट समय के भीतर उपस्थित हो जाता है तो न्यायालय संपत्ति को कुर्की से निर्मुक्त करने का आदेश देगा ।
(2) यदि उद्घोषित व्यक्ति उद्घोषणा में विनिर्दिष्ट समय के भीतर उपस्थित नहीं होता है तो कुर्क संपत्ति, राज्य सरकार के व्यय के अधीन रहेगी, और उसका विक्रय कुर्की की तारीख से छह मास का अवसान हो जाने पर तथा धारा 87 के अधीन किए गए किसी दावे या आपत्ति का उस धारा के अधीन निपटारा हो जाने पर ही किया जा सकता है किंतु यदि वह शीघ्रतया और प्रकृत्या क्षयशील है या न्यायालय के विचार में विक्रय करना स्वामी के फायदे के लिए होगा तो इन दोनों दशाओं में से किसी में भी न्यायालय, जब कभी ठीक समझे, उसका विक्रय करा सकेगा ।
(3) यदि कुर्की की तारीख से दो वर्ष के भीतर कोई व्यक्ति, जिसकी संपत्ति उपधारा (2) के अधीन राज्य सरकार के व्यय के अधीन है या रही है, उस न्यायालय के समक्ष, जिसके आदेश से वह संपत्ति कुर्क की गई थी या उस न्यायालय के समक्ष, जिसके ऐसा न्यायालय अधीनस्थ है, स्वेच्छा से उपस्थित हो जाता है या पकड़कर लाया जाता है और उस न्यायालय को समाधानप्रद रूप में यह साबित कर देता है कि वह वारंट के निष्पादन से बचने के प्रयोजन से फरार नहीं हुआ या नहीं छिपा और यह कि उसे उद्घोषणा की ऐसी सूचना नहीं मिली थी जिससे वह उसमें विनिर्दिष्ट समय के भीतर उपस्थित हो सकता तो ऐसी संपत्ति का, या यदि वह विक्रय कर दी गई है तो विक्रय के शुद्ध आगमों का, या यदि उसका केवल कुछ भाग विक्रय किया गया है तो ऐसे विक्रय के शुद्ध आगमों और अवशिष्ट संपत्ति का, कुर्की के परिणामस्वरूप उपगत सब खर्चों को उसमें से चुका कर, उसे परिदान कर दिया जाएगा ।
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