भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 13/175 / 531
175संज्ञेय मामलों का अन्वेषण करने की पुलिस अधिकारी की शक्ति
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 229स्रोत
(1) कोई पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी, मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना किसी ऐसे संज्ञेय मामले का अन्वेषण कर सकता है, जिसकी जांच या विचारण करने की शक्ति उस थाने की सीमाओं के भीतर के स्थानीय क्षेत्र पर अधिकारिता रखने वाले न्यायालय को अध्याय 14 के उपबंधों के अधीन है :
परन्तु अपराध की प्रकृति और गंभीरता पर विचार करते हुए, पुलिस अधीक्षक, उप पुलिस अधीक्षक से मामले का अन्वेषण करने के लिए अपेक्षा कर सकेगा ।
(2) ऐसे किसी मामले में पुलिस अधिकारी की किसी कार्यवाही को किसी भी प्रक्रम में इस आधार पर प्रश्नगत नहीं किया जाएगा कि वह मामला ऐसा मामला था जिसमें ऐसा अधिकारी इस धारा के अधीन अन्वेषण करने के लिए सशक्त नहीं था ।
(3) धारा 240 के अधीन सशक्त कोई मजिस्ट्रेट, धारा 173 की उपधारा (4) के अधीन किए गए शपथ-पत्र द्वारा समर्थित आवेदन पर विचार करने के पश्चात् और ऐसी जांच, जो वह आवश्यक समझे, करने के पश्चात् तथा इस संबंध में किए गए निवेदन पर, ऊपर उल्लिखित किए गए अनुसार ऐसे अन्वेषण का आदेश कर सकेगा ।
(4) धारा 210 के अधीन, सशक्त कोई मजिस्ट्रेट, लोक सेवक के विरुद्ध परिवाद की प्राप्ति पर, जो उसके शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान उत्पन्न हुआ हो, निम्नलिखित के अध्यधीन—
(क) उसके वरिष्ठ अधिकारी से घटना के तथ्यों और परिस्थितियों को अंतर्विष्ट करने वाली रिपोर्ट की प्राप्ति, और
(ख) लोक सेवक द्वारा किए गए दृढ़कथनों, जो ऐसी स्थिति की बारे में है जिसका परिणाम इस प्रकार यह अभिकथित घटना है, पर विचार करने के पश्चात्, अन्वेषण का आदेश कर सकेगा ।
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