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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 13/193 / 531

193अन्वेषण के समाप्त हो जाने पर पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 240–242स्रोत

(1) इस अध्याय के अधीन किया जाने वाला प्रत्येक अन्वेषण अनावश्यक विलंब के बिना पूरा किया जाएगा ।

(2) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 70 या धारा 7 या लैगिंक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 4, धारा 6, धारा 8 या धारा 10 के अधीन किसी अपराध के संबंध में अन्वेषण उस तारीख से, जिसको पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी द्वारा सूचना अभिलिखित की गई थी, दो मास के भीतर पूरा किया जा सकेगा ।

(3) (i) जैसे ही जांच पूरी होती है, वैसे ही पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी, पुलिस रिपोर्ट पर उस अपराध का संज्ञान करने के लिए सशक्त मजिस्ट्रेट को, राज्य सरकार द्वारा विहित प्ररूप में, जिसमें इलैक्ट्रानिक संसूचना का माध्यम भी है, एक रिपोर्ट भेजेगा, जिसमें निम्नलिखित बातें कथित होंगी :—

(क) पक्षकारों के नाम ;

(ख) सूचना का स्वरूप ;

(ग) मामले की परिस्थितियों से परिचित प्रतीत होने वाले व्यक्तियों के नाम ;

(घ) क्या कोई अपराध किया गया प्रतीत होता है और यदि किया गया प्रतीत होता है, तो किसके द्वारा ;

(ङ) क्या अभियुक्त गिरफ्तार कर लिया गया है :

(च) क्या अभियुक्त अपने बंधपत्र या जमानतपत्र पर छोड़ दिया गया है ;:

(छ) क्या अभियुक्त धारा 190 के अधीन अभिरक्षा में भेजा जा चुका है ;

(ज) जहां अन्वेषण भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 70 या धारा 71 के अधीन किसी अपराध के संबंध में है, वहां क्या महिला की चिकित्सा परीक्षा की रिपोर्ट संलग्न की गई है ;

(झ) इलैक्ट्रानिक युक्ति की दशा में अभिरक्षा का अनुक्रम ;

(ii) पुलिस अधिकारी नब्बे दिन की अवधि के भीतर अन्वेषण की प्रगति की सूचना, किन्हीं भी साधनों द्वारा, जिनके अंतर्गत इलैक्ट्रानिक संसूचना का माध्यम भी है, सूचना देने वाले या पीड़ित व्यक्ति को देगा :

(iii) वह अधिकारी अपने द्वारा की गई कार्यवाही की संसूचना, उस व्यक्ति को, यदि कोई हो, जिसने अपराध किए जाने के संबंध में सर्वप्रथम सूचना दी, उस रीति से देगा, जो राज्य सरकार नियमों द्वारा उपबंधित करे ।

(4) जहां धारा 177 के अधीन कोई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी नियुक्त किया गया है वहां ऐसे किसी मामले में, जिसमें राज्य सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा ऐसा निदेश देती है, वह रिपोर्ट उस अधिकारी के माध्यम से दी जाएगी और वह, मजिस्ट्रेट का आदेश होने तक के लिए, पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को यह निदेश दे सकता है कि वह आगे और अन्वेषण करे ।

(5) जब कभी इस धारा के अधीन भेजी गई रिपोर्ट से यह प्रतीत होता है कि अभियुक्त को उसके बंधपत्र या जमानतपत्र पर छोड़ दिया गया है, तब मजिस्ट्रेट उस बंधपत्र या जमानतपत्र के उन्मोचन के लिए या अन्यथा ऐसा आदेश करेगा, जैसा वह ठीक समझे ।

(6) जब ऐसी रिपोर्ट का संबंध ऐसे मामले से है, जिसको धारा 490 लागू होती है, तब पुलिस अधिकारी मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट के साथ-साथ निम्नलिखित भी भेजेगा :—

(क) वे सब दस्तावेज या उनके सुसंगत उद्धरण, जिन पर निर्भर करने का अभियोजन का विचार है और जो उनसे भिन्न हैं जिन्हें अन्वेषण के दौरान मजिस्ट्रेट को पहले ही भेज दिया गया है ;

(ख) उन सब व्यक्तियों के, जिनकी साक्षियों के रूप में परीक्षा करने का अभियोजन का विचार है, धारा 180 के अधीन अभिलिखित कथन ।

(7) यदि पुलिस अधिकारी की यह राय है कि ऐसे किसी कथन का कोई भाग कार्यवाही की विषयवस्तु से सुसंगत नहीं है या उसे अभियुक्त को प्रकट करना न्याय के हित में आवश्यक नहीं है और लोकहित के लिए असमीचीन है तो वह कथन के उस भाग को उपदर्शित करेगा और अभियुक्त को दी जाने वाली प्रतिलिपि में से उस भाग को निकाल देने के लिए निवेदन करते हुए और ऐसा निवेदन करने के अपने कारणों का कथन करते हुए एक टिप्पण मजिस्ट्रेट को भेजेगा ।

(8) उपधारा (7) में अंतर्विष्ट उपबंधों के अधीन रहते हुए, जहां मामले का अन्वेषण करने वाला पुलिस अधिकारी धारा 230 के अधीन अभियुक्त को प्रदान करने के लिए मजिस्ट्रेट को सम्यक् रूप से सूचीबद्ध अन्य दस्तावेजों के साथ पुलिस रिपोर्ट की उतनी संख्या में प्रतियां, जो अपेक्षित हों, भी प्रस्तुत करेगा :

परन्तु इलैक्ट्रानिक संसूचना द्वारा रिपोर्ट या अन्य दस्तावेजों के प्रदाय को सम्यक् रूप से तामील हुआ माना जाएगा ।

(9) इस धारा की कोई बात किसी अपराध के बारे में उपधारा (3) के अधीन मजिस्ट्रेट को रिपोर्ट भेज दी जाने के पश्चात् आगे और अन्वेषण को निवारित करने वाली नहीं समझी जाएगी तथा जहां ऐसे अन्वेषण पर पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को कोई अतिरिक्त मौखिक या दस्तावेजी साक्ष्य मिले वहां वह ऐसे साक्ष्य के संबंध में अतिरिक्त रिपोर्ट या रिपोर्टे मजिस्ट्रेट को ऐसे साक्ष्य के संबंध में आगे रिपोर्ट या रिपोर्ट ऐसे प्ररूप में, जो राज्य सरकार नियमों द्वारा उपबंध करें भेजेगा, और उपधारा (3) से उपधारा (8) तक के उपबंध ऐसी रिपोर्ट या रिपोर्टों के बारे में, जहां तक हो सके, वैसे ही लागू होंगे, जैसे वे उपधारा (3) के अधीन भेजी गई रिपोर्ट के संबंध में लागू होते हैं :

परन्तु विचारण के दौरान मामले का विचारण करने वाले न्यायालय की अनुमति से अतिरिक्त अन्वेषण संचालित किया जा सकेगा और जो नब्बे दिन की अवधि के भीतर पूरा किया जाएगा जिसका विस्तार न्यायालय की अनुमति से किया जा सकेगा ।

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