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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 13/183 / 531

183संस्वीकृतियों और कथनों को अभिलिखित करना

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 232–234स्रोत

(1) जिले का कोई मजिस्ट्रेट, जिसमें किसी अपराध के किए जाने के बारे में सूचना रजिस्ट्रीकृत की गई है, चाहे उसे मामले में अधिकारिता प्राप्त हो या न हो, इस अध्याय के अधीन या तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि के अधीन किसी अन्वेषण के दौरान या तत्पश्चात् किन्तु जांच या विचारण प्रारंभ होने के पूर्व किसी समय उसके द्वारा की गई किसी संस्वीकृति या कथन को अभिलिखित कर सकता है :

परंतु इस उपधारा के अधीन की गई कोई संस्वीकृति या कथन अपराध के अभियुक्त व्यक्ति के अधिवक्ता की उपस्थिति में श्रव्य-दृश्य इलैक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से भी अभिलिखित किया जा सकेगा :

परंतु यह और कि किसी पुलिस अधिकारी द्वारा, जिसे तत्समय प्रवृत्त किसी विधि के अधीन मजिस्ट्रेट की कोई शक्ति प्रदत्त की गई है, कोई संस्वीकृति अभिलिखित नहीं की जाएगी ।

(2) मजिस्ट्रेट किसी ऐसी संस्वीकृति को अभिलिखित करने के पूर्व उस व्यक्ति को, जो संस्वीकृति कर रहा है, यह समझाएगा कि वह ऐसी संस्वीकृति करने के लिए आबद्ध नहीं है और यदि वह ऐसा करता है तो वह उसके विरुद्ध साक्ष्य में उपयोग में लाई जा सकती है ; और मजिस्ट्रेट कोई ऐसी संस्वीकृति तब तक अभिलिखित न करेगा जब तक उसे करने वाले व्यक्ति से प्रश्न करने पर, उसके पास यह विश्वास करने का कारण न हो कि वह स्वेच्छा से की जा रही है ।

(3) संस्वीकृति अभिलिखित किए जाने से पूर्व यदि मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होने वाला व्यक्ति यह कथन करता है कि वह संस्वीकृति करने के लिए इच्छुक नहीं है तो मजिस्ट्रेट ऐसे व्यक्ति के पुलिस की अभिरक्षा में निरोध को प्राधिकृत नहीं करेगा ।

(4) ऐसी संस्वीकृति किसी अभियुक्त व्यक्ति की परीक्षा को अभिलिखित करने के लिए धारा 36 में उपबंधित रीति से अभिलिखित की जाएगी और संस्वीकृति करने वाले व्यक्ति द्वारा उस पर हस्ताक्षर किए जाएंगे ; और मजिस्ट्रेट ऐसे अभिलेख के नीचे निम्नलिखित भाव का एक ज्ञापन लिखेगा :—

दर (नाम) को यह समझा दिया है कि वह संस्वीकृति करने के

लिए आबद्ध नहीं है और यदि वह ऐसा करता है तो कोई संस्वीकृति, जो वह करेगा, उसके विरुद्ध साक्ष्य में उपयोग में लाई जा सकती है और मुझे विश्वास है कि यह संस्वीकृति स्वेच्छा से की गई है । यह मेरी उपस्थिति में और मेरे सुनते हुए लिखी गई है और जिस व्यक्ति ने यह संस्वीकृति की है उसे यह पढ़कर सुना दी गई है और उसने उसका सही होना स्वीकार किया है और उसके द्वारा किए गए कथन का पूरा और सही वृत्तांत इसमें है । (हस्ताक्षरित) क ख मजिस्ट्रेट |”

(5) उपधारा (1) के अधीन किया गया (संस्वीकृति से भिन्न) कोई कथन साक्ष्य अभिलिखित करने के लिए इसमें इसके पश्चात् उपबंधित ऐसी रीति से अभिलिखित किया जाएगा जो मजिस्ट्रेट की राय में, मामले की परिस्थितियों में सर्वाधिक उपयुक्त हो ; तथा मजिस्ट्रेट को उस व्यक्ति को शपथ दिलाने की शक्ति होगी जिसका कथन इस प्रकार अभिलिखित किया जाता है ।

(6) (क) भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 64, धारा 65, धारा 66, धारा 67, धारा 68, धारा 69, धारा 70, धारा 71, धारा 74, धारा 75, धारा 76, धारा 77, धारा 78, धारा 79 या धारा 124 के अधीन दंडनीय मामलों में मजिस्ट्रेट उस व्यक्ति का, जिसके विरुद्ध उपधारा (5) में विनिर्दिष्ट रीति में ऐसा अपराध किया गया है, कथन जैसे ही अपराध का किया जाना पुलिस की जानकारी में लाया जाता है, अभिलिखित करेगा :

परन्तु ऐसा कथन जहां तक साध्य हो, महिला मजिस्ट्रेट द्वारा और उसकी अनुपस्थिति में पुरूष मजिस्ट्रेट द्वारा महिला की उपस्थिति में अभिलिखित किया जा सकेगा :

परन्तु यह और कि ऐसे अपराधों से संबंधित मामलों में जो दस वर्ष या उससे अधिक के कारावास से या आजीवन या मृत्युदंड से दंडनीय है, मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारी द्वारा उसके समक्ष लाए गए साक्ष्य के कथन को अभिलिखित करेगा :

परन्तु यह भी कि यदि कथन करने वाला व्यक्ति अस्थायी या स्थायी रूप से मानसिक या शारीरिक रूप से दिव्यांग है, तो मजिस्ट्रेट कथन अभिलिखित करने में किसी द्विभाषिए या विशेष शिक्षक की सहायता लेगा :

परन्तु यह भी कि यदि कथन करने वाला व्यक्ति अस्थायी या स्थायी रूप से मानसिक या शारीरिक रूप से दिव्यांग है तो किसी द्विभाषिए या विशेष शिक्षक की सहायता से उस व्यक्ति द्वारा किए गए कथन, श्रव्य-दृश्य इलैक्ट्रानिक साधनों, अधिमानतः मोबाइल फोन के माध्यम से अभिलिखित किया जाएगा ।

(ख) ऐसे किसी व्यक्ति के, जो अस्थायी या स्थायी रूप से मानसिक या शारीरिक रूप से दिव्यांग है, खंड (क) के अधीन अभिलिखित कथन को भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 142 में यथाविनिर्दिष्ट, मुख्य परीक्षा के स्थान पर एक कथन समझा जाएगा और ऐसा कथन करने वाले की, विचारण के समय उसको अभिलिखित करने की आवश्यकता के बिना, ऐसे कथन पर प्रतिपरीक्षा की जा सकेगी ।

(7) इस धारा के अधीन किसी संस्वीकृति या कथन को अभिलिखित करने वाला मजिस्ट्रेट, उसे उस मजिस्ट्रेट के पास भेजेगा, जिसके द्वारा मामले की जांच या विचारण किया जाना है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।