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भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 13/176 / 531

176अन्वेषण के लिए प्रक्रिया

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 229–230स्रोत

(1) यदि पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को, सूचना प्राप्त होने पर या अन्यथा, यह संदेह करने का कारण है कि ऐसा अपराध किया गया है जिसका अन्वेषण करने के लिए धारा 475 के अधीन वह सशक्त है तो वह उस अपराध की रिपोर्ट उस मजिस्ट्रेट को तत्काल भेजेगा जो ऐसे अपराध का पुलिस रिपोर्ट पर संज्ञान करने के लिए सशक्त है और मामले के तथ्यों और परिस्थितियों का अन्वेषण करने के लिए, और यदि आवश्यक हो तो अपराधी का पता चलाने और उसकी गिरफ्तारी के उपाय करने के लिए, उस स्थान पर या तो स्वयं जाएगा या अपने अधीनस्थ अधिकारियों में से एक को भेजेगा जो ऐसी पंक्ति से निम्नतर पंक्ति का न होगा जिसि राज्य सरकार साधारण या विशेष आदेश द्वारा इस निमित्त विहित करे :

परंतु—

(क) जब ऐसे अपराध के किए जाने की कोई सूचना किसी व्यक्ति के विरुद्ध उसका नाम देकर की गई है और मामला गंभीर प्रकार का नहीं है तब यह आवश्यक न होगा कि पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी उस स्थान पर अन्वेषण करने के लिए स्वयं जाए या अधीनस्थ अधिकारी को भेजे ;

(ख) यदि पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को यह प्रतीत होता है कि अन्वेषण करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है तो वह उस मामले का अन्वेषण न करेगा :

परंतु यह और कि बलात्संग के अपराध के संबंध में, पीड़ित का कथन, पीड़ित के निवास पर या उसकी पसंद के स्थान पर और यथासाध्य, किसी महिला पुलिस अधिकारी द्वारा उसके माता-पिता या संरक्षक या नजदीकी नातेदार या परिक्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता की उपस्थिति में अभिलिखित किया जाएगा और ऐसा कथन किसी श्रव्य-दृश्य इलैक्ट्रानिक साधनों, जिसके अंतर्गत मोबाइल फोन भी है, के माध्यम से भी अभिलिखित किया जा सकेगा ।

(2) उपधारा (1) के पहले परंतुक के खंड (क) और खंड (ख) में वर्णित दशाओं में से प्रत्येक दशा में पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी अपनी रिपोर्ट में उसके द्वारा उस उपधारा की अपेक्षाओं का पूर्णतया अनुपालन न करने के अपने कारणों का कथन करेगा और मजिस्ट्रेट को पाक्षिक दैनिक डायरी रिपोर्ट भेजेगा और उक्त परंतुक के खंड (ख) में वर्णित दशा में, अधिकारी, सूचना देने वाले को, यदि कोई हो, ऐसी रीति से, जो राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों द्वारा विहित की जाए, भी तत्काल अधिसूचित करेगा ।

(3) किसी ऐसे अपराध के जो सात वर्ष या अधिक के लिए दंडनीय बनाया गया है, के होने से संबंधित प्रत्येक सूचना की प्राप्ति पर पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी ऐसी तारीख से जो इस संबंध में पांच वर्षों की अवधि के भीतर राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की जाए, अपराध में न्याय संबंधी साक्ष्य संग्रहण करने के लिए न्याय संबंधी विशेषज्ञ को अपराध स्थल पर भिजवाएगा और मोबाइल फोन या किसी अन्य इलैक्ट्रानिक डिवाइस पर प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी बनवाएगा :

परन्तु जहां ऐसे किसी अपराध के संबंध में न्याय संबंधी सुविधा उपलब्ध नहीं है वहां राज्य सरकार जब तक राज्य में उस मामले के संबंध में सुविधा उपलब्ध नहीं कराती है या नहीं तो किसी अन्य राज्य की ऐसी सुविधा के उपयोग को अधिसूचित करेगी ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।