भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 13/184 / 531
184बलात्संग के पीड़ित व्यक्ति की चिकित्सीय परीक्षा
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 234–235स्रोत
(1) जहां, ऐसे प्रक्रम के दौरान जब बलात्संग या बलात्संग करने का प्रयत्न करने के अपराध का अन्वेषण किया जा रहा है उस महिला के शरीर की, जिसके साथ बलात्संग किया जाना या करने का प्रयत्न करना अभिकथित है, किसी चिकित्सा विशेषज्ञ से परीक्षा कराना प्रस्थापित है वहां ऐसी परीक्षा, सरकार या किसी स्थानीय प्राधिकारी द्वारा चलाए जा रहे किसी अस्पताल में नियोजित रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी द्वारा, और ऐसे व्यवसायी की अनुपस्थिति में किसी अन्य रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी द्वारा, ऐसी महिला की सहमति से या उसकी ओर से ऐसी सहमति देने के लिए सक्षम व्यक्ति की सहमति से की जाएगी और ऐसी महिला को, ऐसा अपराध किए जाने से संबंधित सूचना प्राप्त होने के समय से चौबीस घंटे के भीतर ऐसे रजिस्ट्रीकृत चिकित्साव्यवसायी के पास भेजा जाएगा ।
(2) वह रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी, जिसके पास ऐसी महिला भेजी जाती है, बिना किसी विलंब के, उसके शरीर की परीक्षा करेगा और एक परीक्षा रिपोर्ट तैयार करेगा जिसमें निम्नलिखित ब्यौरे दिए जाएंगे, अर्थात् :—
(i) महिला का, और उस व्यक्ति का, जो उसे लाया है, नाम और पता ;
(ii) महिला की आयु ;
(iii) डी एन ए प्रोफाइल करने के लिए महिला के शरीर से ली गई सामग्री का वर्णन;
(iv) महिला के शरीर पर क्षति के, यदि कोई हैं, चिह्न :
(v) महिला की साधारण मानसिक दशा ; और
(vi) उचित ब्यौरे सहित अन्य तात्विक विशिष्टियां ।
(3) रिपोर्ट में संक्षेप में वे कारण अभिलिखित किए जाएंगे जिनसे प्रत्येक निष्कर्ष निकाला गया है ।
(4) रिपोर्ट में विनिर्दिष्ट रूप से यह अभिलिखित किया जाएगा कि ऐसी परीक्षा के लिए महिला की सहमति या उसकी ओर से ऐसी सहमति देने के लिए सक्षम व्यक्ति की सहमति, अभिप्राप्त कर ली गई है ।
(5) रिपोर्ट में परीक्षा प्रारंभ और समाप्त करने का सही समय भी अंकित किया जाएगा ।
(6) रजिस्ट्रीकृत चिकित्सा-व्यवसायी, सात दिनों की अवधि के भीतर रिपोर्ट अन्वेषण अधिकारी को भेजेगा जो उसे धारा 193 में निर्दिष्ट मजिस्ट्रेट को, उस धारा की उपधारा (6) के खंड (क) में निर्दिष्ट दस्तावेजों के भाग के रूप में भेजेगा ।
(7) इस धारा की किसी बात का यह अर्थ नहीं लगाया जाएगा कि वह महिला की सहमति के बिना या उसकी ओर से ऐसी सहमति देने के लिए सक्षम किसी व्यक्ति की सहमति के बिना किसी परीक्षा को विधिमान्य बनाती है ।
स्पष्टीकरण—इस धारा के प्रयोजनों के लिए “परीक्षा” और “रजिस्ट्रीकृत चिकित्साव्यवसायी” के वही अर्थ हैं, जो धारा 51 में उनके लिए क्रमशः हैं ।
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