भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 13/186 / 531
186पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी कब किसी अन्य अधिकारी से तलाशी-वारंट जारी करने की अपेक्षा कर सकता है
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 236स्रोत
(1) पुलिस थाने का भारसाधक अधिकारी या उपनिरीक्षक से अनिम्न पंक्ति का पुलिस अधिकारी, जो अन्वेषण कर रहा है, किसी दूसरे पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी से, चाहे वह उस जिले में हो या दूसरे जिले में हो, किसी स्थान में ऐसे मामले में तलाशी करवाने की अपेक्षा कर सकता है, जिसमें पूर्वकथित अधिकारी स्वयं अपने थाने की सीमाओं के भीतर ऐसी तलाशी करा सकेगा ।
(2) ऐसा अधिकारी ऐसी अपेक्षा किए जाने पर धारा 485 के उपबंधों के अनुसार कार्यवाही करेगा और यदि कोई चीज मिले तो उसे उस अधिकारी के पास भेजेगा, जिसकी अपेक्षा पर तलाशी ली गई है ।
(3) जब कभी यह विश्वास करने का कारण है कि दूसरे पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी से उपधारा (1) के अधीन तलाशी करवाने की अपेक्षा करने में जो विलंब होगा उसका परिणाम यह हो सकता है कि अपराध किए जाने का साक्ष्य छिपा दिया जाए या नष्ट कर दिया जाए, तब पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी के लिए या उस अधिकारी के लिए, जो इस अध्याय के अधीन अन्वेषण कर रहा है, यह विधिपूर्ण होगा कि वह दूसरे पुलिस थाने की स्थानीय सीमाओं के भीतर किसी स्थान की, धारा 185 के उपबंधों के अनुसार, ऐसी तलाशी करे या तलाशी करवाए, मानो ऐसा स्थान उसके अपने थाने की सीमाओं के भीतर हो ।
(4) कोई अधिकारी, जो उपधारा (3) के अधीन तलाशी संचालित कर रहा है, उस पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी को, जिसकी सीमाओं के भीतर ऐसा स्थान है, तलाशी की सूचना तत्काल भेजेगा और ऐसी सूचना के साथ धारा 103 के अधीन तैयार की गई सूची की (यदि कोई हो) प्रति भी भेजेगा और उस अपराध का संज्ञान करने के लिए सशक्त निकटतम मजिस्ट्रेट को धारा 185 की उपधारा (1) और उपधारा (3) में निर्दिष्ट अभिलेखों की प्रतियां भी भेजेगा ।
(5) जिस स्थान की तलाशी ली गई है, उसके स्वामी या अधिभोगी को, आवेदन करने पर उस अभिलेख की, जो मजिस्ट्रेट को उपधारा (4) के अधीन भेजा जाए, प्रति निःशुल्क दी जाएगी ।
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