नई–पुरानी धाराmanzill.com
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023/अध्याय 13/185 / 531

185पुलिस अधिकारी द्वारा तलाशी

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 235स्रोत

(1) जब कभी पुलिस थाने के भारसाधक अधिकारी या अन्वेषण करने वाले पुलिस अधिकारी के पास यह विश्वास करने के उचित आधार हैं कि किसी ऐसे अपराध के अन्वेषण के प्रयोजनों के लिए, जिसका अन्वेषण करने के लिए वह प्राधिकृत है, आवश्यक कोई चीज उस पुलिस थाने की, जिसका वह भारसाधक है या जिससे वह संलग्न है, सीमाओं के भीतर किसी स्थान में पाई जा सकती है और उसकी राय में ऐसी चीज अनुचित विलंब के बिना तलाशी से अन्यथा अभिप्राप्त नहीं की जा सकती, तब ऐसा अधिकारी केस डायरी में अपने विश्वास के आधारों को लेखबद्ध करने, और यथासंभव उस चीज को, जिसके लिए तलाशी ली जानी है, ऐसे लेख में विनिर्दिष्ट करने के पश्चात् उस थाने की सीमाओं के भीतर किसी स्थान में ऐसी चीज के लिए तलाशी ले सकता है या तलाशी करा सकेगा ।

(2) उपधारा (1) के अधीन कार्यवाही करने वाला पुलिस अधिकारी, यदि साध्य है तो, तलाशी स्वयं लेगा ।

परन्तु इस धारा के अधीन संचालित की गई तलाशी श्रव्य-दृश्य इलैक्ट्रानिक साधनों के माध्यम से अधिमानतः मोबाइल फोन द्वारा अभिलिखित की जा सकेगी ।

(3) यदि वह तलाशी स्वयं लेने में असमर्थ है और कोई अन्य ऐसा व्यक्ति, जो तलाशी लेने के लिए सक्षम है, उस समय उपस्थित नहीं है तो वह, ऐसा करने के अपने कारणों को लेखबद्ध करने के पश्चात्, अपने अधीनस्थ किसी अधिकारी से अपेक्षा कर सकता है कि वह तलाशी ले और ऐसे अधीनस्थ अधिकारी को ऐसा लिखित आदेश देगा जिसमें उस स्थान को जिसकी तलाशी ली जानी है, और यथासंभव उस चीज को, जिसके लिए तलाशी ली जानी है, विनिर्दिष्ट किया जाएगा और तब ऐसा अधीनस्थ अधिकारी उस चीज के लिए तलाशी उस स्थान में ले सकेगा ।

(4) तलाशी-वारंटों के बारे में इस संहिता के उपबंध और तलाशियों के बारे में धारा 103 के साधारण उपबंध इस धारा के अधीन ली जाने वाली तलाशी को, जहां तक हो सके, लागू होंगे ।

(5) उपधारा (1) या उपधारा (3) के अधीन बनाए गए किसी भी अभिलेख की प्रतियां तत्काल, किन्तु अड़तालीस घंटों के पश्चात् नहीं, ऐसे निकटतम मजिस्ट्रेट को भेजी जाएंगी, जो उस अपराध का संज्ञान लेने के लिए सशक्त है और जिस स्थान की तलाशी ली गई है, उसके स्वामी या अधिभोगी को, उसके आवेदन करने पर, उसकी एक प्रति मजिस्ट्रेट द्वारा निःशुल्क दी जाएगी ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।