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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 17/434 / 570

382चोरी करने के लिए मृत्यु, उपहति या अवरोध कारित करने की तैयारी के पश्चात् चोरी

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 76स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई चोरी करने के लिए, या चोरी करने के पश्चात् निकल भागने के लिए, या चोरी द्वारा ली गई संपत्ति को रखे रखने के लिए, किसी व्यक्ति की मृत्यु, या उसे उपहति या उसका अवरोध कारित करने की, या मृत्यु का, उपहति का या अवरोध का भय कारित करने की तैयारी करके चोरी करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा ।

दृष्टांत

(क) य के कब्जे में की संपत्ति पर क चोरी करता है और यह चोरी करते समय अपने पास अपने वस्त्रों के भीतर एक भरी हुई पिस्तौल रखता है, जिसे उसने य द्वारा प्रतिरोध किए जाने की दशा में य को उपहति करने के लिए अपने पास रखा था । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।

(ख) क, य की जेब काटता है, और ऐसा करने के लिए अपने कई साथियों को अपने पास इसलिए नियुक्त करता है कि यदि य यह समझ जाए कि क्या हो रहा है और प्रतिरोध करे, या क को पकड़ने का प्रयत्न करे, तो वे य का अवरोध करें । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।