भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 17/462 / 570
410चुराई हुई संपत्ति
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 81स्रोत
यह धारा बदल दी गई है
भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू
1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।
वह संपत्ति, जिसका कब्जा चोरी द्वारा, या उद्दापन द्वारा या लूट द्वारा अंतरित किया गया है, और वह संपत्ति, जिसका आपराधिक दुर्विनियोग किया गया है, या जिसके विषय में आपराधिक न्यासभंग *** किया गया है, चुराई हुई “संपत्ति” कहलाती है, [चाहे वह अंतरण या वह दुर्विनियोग या न्यासभंग [भारत] के भीतर किया गया हो या बाहर] । किंतु यदि ऐसी संपत्ति तत्पश्चात् ऐसे व्यक्ति के कब्जे में पहुंच जाती है, जो उसके कब्जे के लिए वैध रूप से हकदार है, तो वह चुराई हुई संपत्ति नहीं रह जाती ।
संशोधन टिप्पणियां
- 1891 के अधिनियम सं० 12 की धारा 2 और अनुसूची 1 और 1882 के अधिनियम सं० 8 की धारा 9 द्वारा “का अपराध” शब्द निरसित ।
- 1882 के अधिनियम सं० 8 की धारा 9 द्वारा अंतःस्थापित ।
- “ब्रिटिश भारत” शब्दों के स्थान पर, अनुक्रमशः भारतीय स्वतंत्रता (केन्द्रीय अधिनियम तथा अध्यादेश अनुकूलन) आदेश, 1948, विधि अनुकूलन आदेश, 1950 और 1951 के अधिनियम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची द्वारा प्रतिस्थापित ।
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