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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 17/512 / 570

460रात्रौ प्रच्छनन गृह-अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन में संयुक्ततः सम्पृक्त समस्त व्यक्ति दंडनीय हैं, जबकि उनमें से एक द्वारा मृत्यु या घोर उपहति कारित की गई हो

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 87स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

यदि रात्रौ प्रच्छनन गृह-अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन करते समय ऐसे अपराध का दोषी कोई व्यक्ति स्वेच्छया किसी व्यक्ति की मृत्यु या घोर उपहति कारित करेगा या मृत्यु या घोर उपहति कारित करने का प्रयत्न करेगा, तो ऐसे रात्रौ प्रच्छनन गृह-अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन करने में संयुक्ततः सम्पृक्त हर व्यक्ति, [आजीवन कारावास] से, या दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।

संशोधन टिप्पणियां

  1. 1955 के अधिनियम सं० 26 की धारा 117 और अनुसूची द्वारा “आजीवन निर्वासन” के स्थान पर प्रतिस्थापित ।

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