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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 17/492 / 570

440मृत्यु या उपहति कारित करने की तैयारी के पश्चात् की गई रिष्टि

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 85स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई किसी व्यक्ति को मृत्यु या उसे उपहति या उसका सदोष अवरोध कारित करने की अथवा मृत्यु का, या उपहति का, या सदोष अवरोध का भय कारित करने की, तैयारी करके रिष्टि करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि पांच वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।

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