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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 17/510 / 570

458उपहति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् रात्रौ प्रच्छनन गृह-अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 87स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई किसी व्यक्ति को उपहति कारित करने की या किसी व्यक्ति पर हमला करने की या किसी व्यक्ति का सदोष अवरोध या रात्रौ गृह-भेदन करने की अथवा किसी व्यक्ति को उपहति के, या हमले के, या सदोष अवरोध के, भय में डालने की तैयारी करके, रात्रौ प्रच्छनन गृह-अतिचार या रात्रौ गृह-भेदन करेगा, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि चौदह वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा ।

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