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भारतीय दंड संहिता, 1860

भारतीय दंड संहिता, 1860/अध्याय 17/496 / 570

444रात्रौ प्रच्छनन गृह-अतिचार

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, PDF पृष्ठ 85स्रोत

यह धारा बदल दी गई है

भारतीय न्याय संहिता, 2023 · 1 जुलाई 2024 से लागू

1 जुलाई 2024 से पहले किए गए अपराधों का दंड, और उनका अन्वेषण या कार्यवाही, इसी पुरानी संहिता के अनुसार होते हैं, मानो इसका निरसन नहीं हुआ (बीएनएस धारा 358)।

जो कोई सूर्यास्त के पश्चात् और सूर्योदय से पूर्व प्रच्छनन गृह-अतिचार करता है, वह “रात्रौ प्रच्छनन गृह-अतिचार” करता है, यह कहा जाता है।

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