भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 10/156 / 170
156सत्यवादिता परखने के प्रश्नों के उत्तरों का खण्डन करने के लिए साक्ष्य का अपवर्जन
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 528–529स्रोत
पुराना कानून
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
आईईए से मिलान जल्दकिसी साक्षी से ऐसा कोई प्रश्न पूछा गया है, जो जांच से केवल वहीं तक सुसंगत है जहां तक कि वह उसके शील को क्षति पहुंचा कर उसकी विश्वसनीयता को धक्का पहुंचाने की प्रवृत्ति रखता है, और उसने उसका उत्तर दे दिया हो, तब उसका खण्डन करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं दिया जाएगा; किन्तु यदि वह मिथ्या उत्तर देता है, तो तत्पश्चात् उस पर मिथ्या साक्ष्य देने का आरोप लगाया जा सकेगा ।
अपवाद 1—यदि किसी साक्षी से पूछा जाए कि क्या वह पूर्व में किसी अपराध के लिए दोषसिद्ध हुआ था और वह उसे इंकार करे, तो उसकी पूर्व दोषसिद्धि का साक्ष्य दिया जा सकेगा ।
अपवाद 2—यदि किसी साक्षी से उसकी निष्पक्षता पर दोषारोपण करने की प्रवृत्ति रखने वाला कोई प्रश्न पूछा जाए और वह सुझाए हुए तथ्यों को इंकार करते हुए उसका उत्तर देता है, तो उसका खण्डन किया जा सकेगा ।
दृष्टांत
(क) किसी अंडरराइटर के विरुद्ध एक दावे का प्रतिरोध कपट के आधार पर किया जाता है । दावेदार से पूछा जाता है कि क्या उसने पिछले किसी संव्यवहार में कपटपूर्ण दावा नहीं किया था । वह इससे इंकार करता है । यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य प्रस्थापित किया जाता है कि उसने ऐसा दावा सचमुच किया था । यह साक्ष्य अग्राह्य है ।
(ख) किसी साक्षी से पूछा जाता है कि क्या वह किसी ओहदे से बेईमानी के लिए पदच्युत नहीं किया गया था । वह इससे इंकार करता है । यह दर्शित करने के लिए कि वह बेईमानी के लिए पदच्युत किया गया था साक्ष्य प्रस्थापित किया जाता है । यह साक्ष्य ग्राह्य नहीं है ।
(ग) क अभिपुष्ट करता है कि उसने अमुक दिन ख को गोवा में देखा । क से पूछा जाता है कि क्या वह स्वयं उस दिन वाराणसी में नहीं था । वह इससे इंकार करता है । यह दर्शित करने के लिए कि क उस दिन वाराणसी में था साक्ष्य प्रस्थापित किया जाता है । यह साक्ष्य ग्राह्य है, इस नाते नहीं कि वह क का एक तथ्य के बारे में खण्डन करता है जो उसकी विश्वसनीयता पर प्रभाव डालता है, बल्कि इस नाते कि वह इस अभिकथित तथ्य का खण्डन करता है कि ख प्रश्नगत दिन गोवा में देखा गया था । इनमें से प्रत्येक मामले में साक्षी पर, यदि उसका इंकार करना मिथ्या था, मिथ्या साक्ष्य देने का आरोप लगाया जा सकेगा ।
(घ) क से पूछा जाता है कि क्या उसके कुटुम्ब और ख के, जिसके विरुद्ध वह साक्ष्य देता है, कुटुम्ब में कुल बैर नहीं रहा था । वह इसे इंकार करता है । उसका खण्डन इस आधार पर किया जा सकेगा कि यह प्रश्न उसकी निष्पक्षता पर दोषारोपण करने की प्रवृत्ति रखता है ।
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