भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 10/168 / 170
168प्रश्न करने या प्रस्तुत करने का आदेश देने की न्यायाधीश की शक्ति
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 532स्रोत
पुराना कानून
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
आईईए से मिलान जल्दन्यायाधीश सुसंगत तथ्यों का पता चलाने के लिए या उनका सबूत अभिप्राप्त करने के लिए, किसी भी रूप में किसी भी समय किसी भी साक्षी या पक्षकारों से किसी भी तथ्य के बारे में कोई भी प्रश्न, जो वह आवश्यक समझे, पूछ सकेगा, तथा किसी भी दस्तावेज या चीज को प्रस्तुत करने का आदेश दे सकेगा ; और न तो पक्षकार और न उनके प्रतिनिधि हकदार होंगे कि वह किसी भी ऐसे प्रश्न या आदेश के प्रति कोई भी आक्षेप करें, न ऐसे किसी भी प्रश्न के प्रत्युत्तर में दिए गए किसी भी उत्तर पर किसी भी साक्षी की न्यायालय की अनुमति के बिना प्रतिपरीक्षा करने के हकदार होंगे :
परन्तु निर्णय, उन तथ्यों पर आधारित होना चाहिए, जो इस अधिनियम द्वारा सुसंगत घोषित किए गए हैं और जो सम्यक् रूप से साबित किए गए है :
परन्तु यह और कि न तो यह धारा न्यायाधीश को, किसी साक्षी को किसी ऐसे प्रश्न का उत्तर देने के लिए या किसी ऐसे दस्तावेज को प्रस्तुत करने को विवश करने के लिए प्राधिकृत करेगी, जिसका उत्तर देने से या जिसे प्रस्तुत करने से, यदि प्रतिपक्षी द्वारा वह प्रश्न पूछा गया होता या वह दस्तावेज मंगाया गया होता, तो ऐसा साक्षी धारा 127 से धारा 136, दोनों सहित, के अधीन उत्तर देने या प्रस्तुत करने से इंकार करने का हकदार होता; और न न्यायाधीश कोई ऐसा प्रश्न पूछेगा जिसका पूछना किसी अन्य व्यक्ति के लिए धारा 151 या धारा 152 के अधीन अनुचित होता; और न वह इसमें इसके पूर्व अपवादित दशाओं के सिवाय, किसी भी दस्तावेज के प्राथमिक साक्ष्य का दिया जाना अभिमुक्त करेगा ।
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