भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023/अध्याय 10/158 / 170
158साक्षी की विश्वसनीयता पर अधिक्षेप
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 529–530स्रोत
पुराना कानून
भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872
आईईए से मिलान जल्दकिसी साक्षी की विश्वसनीयता पर प्रतिपक्षी द्वारा, या न्यायालय की सम्मति से उस पक्षकार द्वारा, जिसने उसे बुलाया है, निम्नलिखित प्रकारों से अधिक्षेप किया जा सकेगा—
(क) उन व्यक्तियों के साक्ष्य द्वारा, जो यह परिसाक्ष्य देते हैं कि साक्षी के बारे में अपने ज्ञान के आधार पर, वे उसे विश्वसनीयता का अपात्र समझते हैं ;
(ख) इस सबूत द्वारा कि साक्षी को रिश्वत दी गई है या उसने रिश्वत की प्रस्थापना स्वीकार कर ली है या उसे अपना साक्ष्य देने के लिए कोई अन्य भ्रष्ट उत्प्रेरणा मिली है ;
(ग) उसके साक्ष्य के किसी ऐसे भाग से असंगत पिछले कथनों के सबूत द्वारा, जिसका खण्डन किया जा सकता है ।
स्पष्टीकरण—कोई साक्षी जो किसी अन्य साक्षी को विश्वसनीयता के लिए अपात्र घोषित करता है, उससे की गई मुख्य परीक्षा में उसके विश्वास के कारणों को चाहे न बताए, किन्तु प्रतिपरीक्षा में उससे उनके कारणों को पूछा जा सकेगा, और उन उत्तरों का, जिन्हें वह देता है, खण्डन नहीं किया जा सकता, तथापि यदि वे मिथ्या है, तो तत्पश्चात् उस पर मिथ्या साक्ष्य देने का आरोप लगाया जा सकेगा ।
दृष्टांत
(क) ख को बेचे गए और परिदान किए गए माल के मूल्य के लिए ख पर क वाद लाता है । ग कहता है कि उसने ख को माल का परिदान किया । यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य प्रस्थापित किया जाता है कि किसी पूर्व अवसर पर उसने कहा था कि उसने उस माल का परिदान ख को नहीं किया था । यह साक्ष्य ग्राह्य है ।
(ख) क, ख की हत्या का अभियुक्त है । ग कहता है कि ख ने मरते समय यह घोषित किया था कि क ने ख को यह घाव दिया था, जिससे वह मर गया । यह दर्शित करने के लिए साक्ष्य प्रस्थापित किया जाता है कि किसी पूर्व अवसर पर ग ने कहा था कि ख ने मृत्यु के समय यह घोषित नहीं किया कि क ने ख को वह घाव दिया था, जिससे उसकी मृत्यु हुई । यह साक्ष्य ग्राह्य है ।
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