भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 6/109 / 358
109हत्या करने का प्रयत्न
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 56–57स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्द(1) जो कोई, किसी कृत्य को ऐसे आशय या ज्ञान से और ऐसी परिस्थितियों में करता है कि यदि वह उस कृत्य द्वारा मृत्यु कारित कर देता तो वह हत्या का दोषी होता, वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा, और यदि ऐसे कार्य द्वारा किसी व्यक्ति को उपहति कारित हो जाए, तो वह अपराधी या तो आजीवन कारावास से या ऐसे दण्ड से दण्डनीय होगा, जैसा इसमें इसके पूर्व वर्णित है ।
(2) जब उपधारा (1) के अधीन अपराध करने वाला कोई व्यक्ति आजीवन कारावास के दण्डादेश के अधीन है, तब यदि उपहति कारित करता है, तो वह मृत्यु या आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, से दण्डित किया जाएगा ।
दृष्टांत
(क) य का वध करने के आशय से क उस पर ऐसी परिस्थितियों में गोली चलाता है कि यदि मृत्यु हो जाती, तो क हत्या का दोषी होता । क इस धारा के अधीन दण्डनीय है ।
(ख) क सुकुमार अवस्था के किसी शिशु की मृत्यु करने के आशय से उसे एक निर्जन स्थान में अरक्षित छोड़ देता है । क ने इस धारा द्वारा परिभाषित अपराध किया है, यद्यपि परिणामस्वरूप उस शिशु की मृत्यु नहीं होती ।
(ग) य की हत्या का आशय रखते हुए क एक बन्दूक खरीदता है और उसको भरता है । क ने अभी तक अपराध नहीं किया है । य पर क बन्दूक चलाता है । उसने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है, और यदि इस प्रकार गोली मार कर वह य को घायल कर देता है, तो वह उपधारा (1) के पश्चात्वर्ती भाग द्वारा उपबन्धित दण्ड से दण्डनीय है ।
(घ) विष द्वारा य की हत्या करने का आशय रखते हुए क विष खरीदता है, और उसे उस भोजन में मिला देता है, जो क के अपने पास रहता है क ने इस धारा में परिभाषित अपराध अभी तक नहीं किया है । क उस भोजन को य की मेज पर रखता है, या उसको य की मेज पर रखने के लिए य के सेवकों को परिदत्त करता है । क ने इस धारा में परिभाषित अपराध किया है ।
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