भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 6/143 / 358
143व्यक्ति का दुर्व्यापार
अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 73–74स्रोत
पुराना कानून
भारतीय दंड संहिता, 1860
आईपीसी से मिलान जल्द(1) जो कोई, शोषण के प्रयोजन से,—
(क) धमकियों का प्रयोग करके ; या
(ख) बल, या किसी भी अन्य प्रकार के प्रपीड़न का प्रयोग करके ; या
(ग) अपहरण द्वारा ; या
(घ) कपट का प्रयोग करके या प्रवंचना द्वारा ; या
(ङ) शक्ति का दुरुपयोग करके ; या
(च) उत्प्रेरणा द्वारा, जिसके अंतर्गत ऐसे किसी व्यक्ति की, जो भर्ती किए गए, परिवहनित, संश्रित, स्थानांतरित या गृहीत व्यक्ति पर नियंत्रण रखता है, सम्मति प्राप्त करने के लिए भुगतान करना या फायदे देना या प्राप्त करना भी आता है,
किसी व्यक्ति या किन्हीं व्यक्तियों को भर्ती करता है, परिवहनित करता है, संश्रय देता है, स्थानांतरित करता है, या गृहीत करता है, वह दुर्व्यापार का अपराध करता है ।
स्पष्टीकरण —“शोषण” पद के अंतर्गत शारीरिक शोषण का कोई कृत्य या किसी प्रकार का लैंगिक शोषण, दासता, या दासता के समान व्यवहार, अधिसेविता, भिक्षावृत्ति या अंगों का बलात् अपसारण भी है ।
स्पष्टीकरण 2—दुर्व्यापार के अपराध के अवधारण में, पीड़ित की सम्मति महत्वहीन है ।
(2) जो कोई, दुर्व्यापार का अपराध करता है वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो दस वर्ष तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(3) जहां अपराध में एक से अधिक व्यक्तियों का दुर्व्यापार अंतर्वलित है, वहां वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(4) जहां अपराध में किसी शिशु का दुर्व्यापार अंतर्वलित है, वहां वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(5) जहां अपराध में एक से अधिक शिशु का दुर्व्यापार अंतर्वलित है, वहां वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि चौदह वर्ष से कम की नहीं होगी, किंतु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी, दंडनीय होगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(6) यदि किसी व्यक्ति को किसी शिशु का एक से अधिक अवसरों पर दुर्व्यापार किए जाने के अपराध के लिए सिद्धदोष ठहराया जाता है तो ऐसा व्यक्ति आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, से दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
(7) जहां कोई लोक सेवक या कोई पुलिस अधिकारी, किसी व्यक्ति के दुर्व्यापार में अंतर्वलित है, वहां ऐसा लोक सेवक या पुलिस अधिकारी आजीवन कारावास, जिससे उस व्यक्ति के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत होगा, से दंडित किया जाएगा और जुर्माने का भी दायी होगा ।
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