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भारतीय न्याय संहिता, 2023

भारतीय न्याय संहिता, 2023/अध्याय 6/116 / 358

116घोर उपहति

अभी सत्यापित नहींआधिकारिक PDF, राजपत्र पृष्ठ 61स्रोत

पुराना कानून

भारतीय दंड संहिता, 1860

आईपीसी से मिलान जल्द

केवल निम्नलिखित उपहति को “घोर उपहति” के रूप मे निर्दिष्ट किया गया है, अर्थात् :—

(क) पुंस्त्वहरण ;

(ख) दोनों में से किसी भी नेत्र की दृष्टि का स्थायी विच्छेद ;

(ग) दोनों में से किसी भी कान की श्रवणशक्ति का स्थायी विच्छेद ;

(घ) किसी भी अंग या जोड़ का विच्छेद ;

(ङ) किसी भी अंग या जोड़ की शक्तियों का नाश या स्थायी हास :

(च) सिर या चेहरे का स्थायी विद्रूपीकरण ;

(छ) अस्थि या दांत का भंग या विसंधान ;

(ज) कोई उपहति जो जीवन को संकट में डालती है या जिसके कारण उपहत व्यक्ति पंद्रह दिन तक तीव्र शारीरिक पीड़ा में रहता है या अपने सामान्य कामकाज को करने में असमर्थ रहता है ।

यह वेबसाइट केवल जानकारी के लिए है, कानूनी सलाह नहीं। किसी भी अंतर की स्थिति में भारत के राजपत्र में प्रकाशित आधिकारिक पाठ ही मान्य होगा।